रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत ढही, चार की मौत; हादसे के बाद जांच और जिम्मेदारी पर उठे सवाल

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गिरने से चार लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। राहत एवं बचाव अभियान जारी है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्यों की निगरानी पर सवाल उठाए हैं, जबकि डीडीए ने कहा है कि संबंधित क्षेत्र वर्ष 2016 में डी-नोटिफाई किया जा चुका था। एमसीडी ने प्रारंभिक जांच में प्लंबिंग कार्य के दौरान कॉलम और बीम में ड्रिलिंग को संभावित कारण बताया है।

Jul 9, 2026 - 11:32
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रोहिणी में निर्माणाधीन इमारत ढही, चार की मौत; हादसे के बाद जांच और जिम्मेदारी पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गिरने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चलाया गया। पुलिस के अनुसार मलबे में कुछ अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते देर शाम तक अभियान जारी रहा।

पुलिस के मुताबिक घटना की सूचना शाम करीब 4:30 बजे मिली। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), राजस्व विभाग, एंबुलेंस सेवा, टाटा पावर और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

अधिकारियों के अनुसार मलबे से अब तक चार लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें 42 वर्षीय राम किशोर को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। घायलों में रवि और सद्दाम शामिल हैं। सद्दाम के हाथ और पैर में फ्रैक्चर होने की जानकारी मिली है और उनका इलाज बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में जारी है। इसके अलावा दो अन्य लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के प्रतिनिधियों ने निर्माण गतिविधियों की निगरानी को लेकर संबंधित विभागों पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि डीडीए, एमसीडी, दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा निर्माणाधीन भवनों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता, जिससे भवन नियमों के उल्लंघन और संभावित जोखिम समय रहते सामने नहीं आ पाते।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेष रूप से अनधिकृत कॉलोनियों और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की नियमित जांच और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि निर्माण मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए तो इस प्रकार के हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

हादसे के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने भी आधिकारिक बयान जारी किया। डीडीए के अनुसार जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, उसे वर्ष 2016 में डी-नोटिफाई कर स्थानीय निकाय को हस्तांतरित कर दिया गया था। इसके बाद उस क्षेत्र का प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव संबंधित स्थानीय निकाय के अधीन है।

वहीं, नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भवन का निर्माण हाल ही में सरल योजना के तहत स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के अनुसार किया गया था। प्रारंभिक जांच में यह जानकारी सामने आई है कि हादसे के समय इमारत में फिनिशिंग का कार्य चल रहा था। अधिकारियों के अनुसार प्लंबिंग कार्य के दौरान कथित रूप से कॉलम और बीम में ड्रिलिंग एवं छेद किए गए थे, जिन्हें इमारत गिरने के संभावित कारणों में शामिल माना जा रहा है। हालांकि वास्तविक कारण विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

एमसीडी ने यह भी बताया कि राजधानी में हर वर्ष संभावित खतरनाक इमारतों की पहचान के लिए विशेष सर्वे अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष 27 जून तक लगभग 28 लाख इमारतों का सर्वे किया गया, जिनमें 19 भवनों को खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया। संबंधित भवन मालिकों को आवश्यक कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ हादसे के कारणों की विस्तृत जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।