सोने की परत वाली रामचरितमानस लापता होने का दावा, पूर्व गृह सचिव ने ट्रस्ट पर उठाए सवाल

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान की गई सोने की परत वाली रामचरितमानस के लापता होने का दावा सामने आया है। पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण ने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट को दान देने के बाद उन्हें इसकी रसीद नहीं मिली और अब इस बहुमूल्य रामचरितमानस का कोई पता नहीं है। वहीं मंदिर ट्रस्ट की ओर से इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Jul 5, 2026 - 13:23
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सोने की परत वाली रामचरितमानस लापता होने का दावा, पूर्व गृह सचिव ने ट्रस्ट पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में दान की गई सोने की परत वाली रामचरितमानस को लेकर नया विवाद सामने आया है। पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण ने दावा किया है कि उनके द्वारा मंदिर ट्रस्ट को दान की गई बहुमूल्य रामचरितमानस का अब कोई पता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि दान देने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें इसकी रसीद तक उपलब्ध नहीं कराई और अब इसकी वर्तमान स्थिति की कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।

पूर्व गृह सचिव के अनुसार, उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को अपनी पत्नी के साथ मिलकर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को सोने की परत चढ़ी विशेष रामचरितमानस भेंट की थी। उनका कहना है कि यह धार्मिक ग्रंथ सोने, चांदी और तांबे से निर्मित है, जिसका कुल वजन लगभग 147 किलोग्राम है। इसमें 522 पन्ने हैं, जिन पर करीब साढ़े आठ सौ ग्राम सोने की परत चढ़ी हुई है। इन पन्नों पर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सभी 10,902 श्लोक अंकित किए गए हैं।

लक्ष्मीनारायण का आरोप है कि इस विशेष रामचरितमानस को तैयार करने के लिए उन्होंने अपनी मां और पत्नी के आभूषण तक गलवाए थे। उनका कहना है कि शुरुआत में इसे मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था और नियमित रूप से इसकी पूजा भी होती थी, लेकिन कुछ समय बाद इसे वहां से हटा दिया गया। अब यह कहां है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी जा रही है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात कर अपनी बात रखी थी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यमंत्री के सलाहकार रहे अवनीश अवस्थी से भी उन्होंने इस विषय पर चर्चा की। उनका आरोप है कि समाधान के बजाय उन्हें दान को दान मानकर भूल जाने की सलाह दी गई।

पूर्व गृह सचिव ने यह भी दावा किया कि जब उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से इस विषय पर बात की तो उन्हें जवाब मिला कि मंदिर में क्या रहेगा और क्या नहीं, इसका निर्णय ट्रस्ट ही करेगा। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता आवश्यक है और दान में मिली वस्तुओं का सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

हालांकि, इन आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामला सामने आने के बाद मंदिर में दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं के रखरखाव, रिकॉर्ड और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।