जानकारी के अनुसार उस समय द हिंदू अखबार की कीमत दो आने हुआ करती थी। परिशिष्ट सहित अखबार का एक अंक 32 पेज का था। इसमें उस दौर के समाचारों के साथ राजनीति, व्यापार, खेल, विज्ञापन और सिने जगत से संबंधित सामग्री भी प्रकाशित की गई थी। अखबार के पन्नों को देखने पर उस समय के सामाजिक और राजनीतिक वातावरण की झलक मिलती है।
बताया गया कि द हिंदू उस दौर में मद्रास से प्रकाशित होता था, जिसे वर्तमान समय में चेन्नई के नाम से जाना जाता है। 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 की ऐतिहासिक तिथियों से जुड़े अखबारों की विशेष प्रतियां दोबारा प्रकाशित कर उपलब्ध कराई गई थीं। दोनों तिथियों के अखबारों की पांच-पांच हजार प्रतियां पुनः प्रकाशित किए जाने की जानकारी दी गई है।
मोहम्मद फैसल खान को इन ऐतिहासिक अखबारों के बारे में ऑनलाइन जानकारी मिली तो उनकी जिज्ञासा बढ़ी। इसके बाद उन्होंने संबंधित ऑनलाइन माध्यम से संपर्क कर दोनों ऐतिहासिक दिनों की एक-एक प्रति मंगाई। बताया गया कि उन्होंने प्रति कॉपी 500 रुपये की कीमत पर दोनों अखबारों की प्रतियां प्राप्त कीं और आज भी इन्हें सुरक्षित रखा है।
इन ऐतिहासिक अखबारों की खासियत यह है कि इनमें केवल राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख नहीं है, बल्कि उस समय के समाज और देश की परिस्थितियों से जुड़े विभिन्न विषयों को भी जगह दी गई है। वर्तमान समय के दैनिक अखबारों की तरह इनमें समाचार, विज्ञापन, खेल, राजनीति, व्यापार और सिनेमा जगत से संबंधित सामग्री का संग्रह देखने को मिलता है।
अखबार में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से संबंधित सामग्री भी प्रकाशित की गई है। इसके अलावा उस समय मंत्रिमंडल में शामिल सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ राजेंद्र प्रसाद, सरदार बलदेव सिंह, आरके षणमुखम चेट्टी, डॉ भीमराव अंबेडकर, डॉ जॉन मथाई, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सीएच भाभा, जगजीवन राम, रफी अहमद किदवई, मौलाना अबुल कलाम आजाद और राजकुमारी अमृत कौर जैसे प्रमुख नेताओं से संबंधित सामग्री भी अखबार में देखने को मिलती है।
इन अखबारों को पढ़ते हुए पाठक उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से रूबरू हो सकता है। देश की आजादी और उसके बाद गणतंत्र बनने के महत्वपूर्ण कालखंड से संबंधित प्रकाशित सामग्री आज ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में महत्व रखती है।
मोहम्मद फैसल खान के पास सुरक्षित इन दोनों पुनर्प्रकाशित प्रतियों के माध्यम से नई पीढ़ी को भी उस दौर के समाचार माध्यमों और देश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को समझने का अवसर मिल सकता है। इतिहास और पुराने समाचार पत्रों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह संग्रह खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।