गोर्राटोला में परिवार के सामाजिक बहिष्कार का आरोप, बातचीत करने पर 5 हजार रुपए जुर्माने का दावा

अंबागढ़ चौकी विकासखंड के गोर्राटोला गांव में एक परिवार ने सामाजिक बहिष्कार किए जाने का आरोप लगाया है। चन्द्रप्रकाश कौशिक का कहना है कि अपनी लगानी भूमि के नक्शा सुधार और सीमांकन के लिए आवेदन करने के बाद गांव में उनके परिवार से दूरी बनाई गई। परिवार का आरोप है कि उनसे बातचीत या मेलजोल रखने वालों पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाने की बात कही गई है। मामले की शिकायत पुलिस से की गई है। टीआई अश्वनी राठौर ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार की शिकायत मिली है और जांच की जा रही है। आरोप प्रमाणित होने पर वैधानिक कार्रवाई की बात कही गई है।

Sep 29, 2026 - 19:00
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गोर्राटोला में परिवार के सामाजिक बहिष्कार का आरोप, बातचीत करने पर 5 हजार रुपए जुर्माने का दावा

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद सेख, मानपुर l अंबागढ़ चौकी विकासखंड के गोर्राटोला गांव में एक परिवार ने सामाजिक बहिष्कार किए जाने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि अपनी लगानी भूमि के नक्शा सुधार और सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन करने के बाद गांव में उनके परिवार के साथ कथित तौर पर दूरी बनाई जाने लगी। परिवार ने इस संबंध में पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

गोर्राटोला निवासी चन्द्रप्रकाश कौशिक के अनुसार वह अपनी मां, पत्नी और तीन बच्चों के साथ गांव में रहते हैं। उनका कहना है कि उनके नाम से खसरा नंबर 369 में जमीन दर्ज है और मौके पर मकान बनाकर परिवार निवास कर रहा है। चन्द्रप्रकाश का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड और मौके के नक्शे में अंतर होने के कारण उन्होंने भूमि के नक्शा सुधार और सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन किया था।

परिवार के आरोप के मुताबिक इसके बाद गांव में उनके साथ अनबन बढ़ गई और कथित पंचायत की ओर से सामाजिक बहिष्कार किया गया। चन्द्रप्रकाश ने थाना प्रभारी को दिए आवेदन में पांच लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की है।

बातचीत करने पर 5 हजार रुपए जुर्माने का आरोप

चन्द्रप्रकाश का आरोप है कि कथित पंचायत की ओर से यह कहा गया कि यदि गांव का कोई व्यक्ति या परिवार उनके परिवार से बातचीत या मेलजोल रखता पाया गया तो उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

परिवार के अनुसार गांव में ऑनलाइन कंप्यूटर सेंटर संचालित करने वाले टोमन निर्मलकर ने उनके परिवार से बातचीत की और बाइक मांगी थी। इसके बाद कथित तौर पर उस पर भी 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया और निर्धारित अवधि में राशि जमा करने की बात कही गई।

चन्द्रप्रकाश का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार का असर उनके बच्चों पर भी पड़ा है। उनका आरोप है कि गांव के अन्य बच्चे उनके बच्चों से बातचीत और खेलकूद में शामिल नहीं होते।

दुकान और नाई का काम प्रभावित होने का दावा

चन्द्रप्रकाश गांव में अपने मकान के सामने फैंसी मनिहारी, फोटोकॉपी और स्टेशनरी की दुकान संचालित करते हैं। उनका दावा है कि सामाजिक बहिष्कार के बाद दुकान पर ग्राहकों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।

परिवार के अनुसार वे नाई समुदाय से हैं और परिवार के कुछ सदस्य गांव में पारंपरिक नाई का काम भी करते हैं। उनका आरोप है कि बहिष्कार के बाद ग्रामीणों ने यह काम लेना बंद कर दिया और अन्य गांवों से सेवाएं लेने लगे।

भूमि विवाद का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा

चन्द्रप्रकाश ने बताया कि खसरा नंबर 369 की जमीन के नक्शा सुधार को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में WPC नंबर 3454/2025 दायर किया है। उनके अनुसार न्यायालय ने 90 दिनों की समय-सीमा में नक्शा सुधार का आदेश दिया था। राहत नहीं मिलने पर उन्होंने दोबारा न्यायालय का रुख किया है।

इसी बीच ग्राम पंचायत की ओर से उन्हें एक अन्य भूमि को लेकर कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया है। पंचायत का दावा है कि खसरा नंबर 370 की शासकीय भूमि के एक हिस्से पर कब्जा किया गया है। वहीं चन्द्रप्रकाश का कहना है कि उन्होंने किसी शासकीय भूमि पर कब्जा नहीं किया और जिस जमीन पर वह काबिज हैं, वह उनकी लगानी भूमि है।

टीआई अश्वनी राठौर ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार किए जाने की शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है। आरोप प्रमाणित होने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।