पैरावट से गिरकर टूटा था कंधा, उसी हादसे ने बना दिया डॉक्टर; छोटेडोंगर के चंद्रेश पात्र बने MBBS डॉक्टर

नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर निवासी चंद्रेश पात्र ने कठिन संघर्ष और कई हादसों के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार MBBS डॉक्टर बनकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया। आर्थिक तंगी, चोट और असफलताओं के बाद भी उन्होंने लगातार मेहनत की और मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की।

May 12, 2026 - 14:33
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पैरावट से गिरकर टूटा था कंधा, उसी हादसे ने बना दिया डॉक्टर; छोटेडोंगर के चंद्रेश पात्र बने MBBS डॉक्टर

UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर क्षेत्र से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। लेगड़ीबाई गांव निवासी चंद्रेश पात्र ने कठिन परिस्थितियों, आर्थिक तंगी और लगातार आने वाली परेशानियों के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार एमबीबीएस डॉक्टर बनकर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया। उनकी सफलता से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

चंद्रेश पात्र के पिता अंतू राम पात्र एक साधारण किसान हैं। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े चंद्रेश ने बचपन से ही संघर्ष देखा। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कक्षा पहली से दसवीं तक छोटेडोंगर में ही हुई। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे चंद्रेश ने दसवीं कक्षा में टॉप किया था। उस समय उनका सपना इंजीनियर बनने का था, लेकिन एक हादसे ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

चंद्रेश बताते हैं कि एक दिन घर की पैरावट से गिरने के कारण उनका कंधा टूट गया। गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें ठीक होने में लगभग एक साल का समय लगा। इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि गांव और ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छे डॉक्टरों की कितनी जरूरत है। तब उन्होंने ठान लिया कि अब उन्हें डॉक्टर बनना है।

दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नारायणपुर में प्रवेश लिया और 11वीं-12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे नीट परीक्षा की तैयारी के लिए भिलाई गए। लेकिन किस्मत ने यहां भी उनकी परीक्षा ली। नीट परीक्षा से ठीक एक महीने पहले होली के दौरान उनका पैर टूट गया। इस हादसे के बाद उन्हें फिर लगभग एक साल तक संघर्ष करना पड़ा।

स्वास्थ्य ठीक होने के बाद चंद्रेश ने वर्ष 2017 में नीट परीक्षा पास कर ली, लेकिन मेडिकल कॉलेज में चयन नहीं हो पाया। यह उनके लिए बड़ा झटका था। वे काफी निराश हुए, लेकिन परिवार और दोस्तों ने उनका हौसला बढ़ाया और दोबारा प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।

चंद्रेश ने हार मानने के बजाय और ज्यादा मेहनत की। उन्होंने फिर से नीट की तैयारी शुरू की और आखिरकार वर्ष 2020 में उन्हें सफलता मिली। उनका चयन राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंह देव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में हुआ। अब उन्होंने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली है और डॉक्टर बन गए हैं।

चंद्रेश का संघर्ष केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं था। वे छुट्टियों के दौरान अपने पिता के साथ खेतों में काम करते थे और मवेशियों को चराने भी ले जाते थे। आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि कई बार वे बिना चप्पल पहने स्कूल जाया करते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।

आज चंद्रेश पात्र की सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी मेहनत, संघर्ष तथा दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना कर रहे हैं। परिवार भी बेटे की इस उपलब्धि पर बेहद गर्व महसूस कर रहा है।