संलग्नीकरण पर सवाल: व्याख्याता बनी आश्रम अधीक्षक, मूल स्कूल का रिजल्ट गिरकर 36 प्रतिशत

अंबागढ़ चौकी के पीएम श्री स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम विद्यालय की व्याख्याता को दो वर्षों से आदिवासी कन्या आश्रम में संलग्न रखने को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि शिक्षकों की कमी के बावजूद संलग्नीकरण जारी रहने से विद्यालय का परीक्षा परिणाम 36 प्रतिशत तक गिर गया।

Jul 21, 2026 - 15:50
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संलग्नीकरण पर सवाल: व्याख्याता बनी आश्रम अधीक्षक, मूल स्कूल का रिजल्ट गिरकर 36 प्रतिशत

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद खान, मानपुर l अंबागढ़ चौकी विकासखंड में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पीएम श्री स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम विद्यालय में पदस्थ एक व्याख्याता को पिछले दो वर्षों से आदिवासी कन्या आश्रम में संलग्न रखे जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग ने शिक्षकों की कमी वाले विद्यालय से व्याख्याता को हटाकर आश्रम अधीक्षक का दायित्व सौंप दिया, जिससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई और परीक्षा परिणाम गिरकर मात्र 36 प्रतिशत रह गया।

जानकारी के अनुसार, पीएम श्री स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम विद्यालय में राजनीति विज्ञान की व्याख्याता नीलिमा अम्बादे को लगभग दो वर्ष पहले आदिवासी कन्या आश्रम मक्के में संलग्न किया गया था। बताया जा रहा है कि विद्यालय में पहले से ही कई शिक्षकीय पद रिक्त हैं, इसके बावजूद संलग्नीकरण समाप्त नहीं किया गया।

इस बीच लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी निर्देशों में सभी संलग्न शिक्षकों को उनके मूल संस्थान में वापस पदभार ग्रहण कराने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली (VSK App) के माध्यम से भी इस संबंध में आदेश जारी किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि आरोप है कि संबंधित व्याख्याता अब तक अपने मूल विद्यालय में वापस नहीं लौटी हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई, जिसका असर परीक्षा परिणाम पर भी दिखाई दिया। हालिया परीक्षा में विद्यालय का परिणाम केवल 36 प्रतिशत रहने से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यदि समय रहते संलग्नीकरण समाप्त कर शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती, तो परिणाम बेहतर हो सकता था।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि आदिवासी कन्या आश्रम के अधीक्षक का दायित्व शिक्षक या सहायक शिक्षक को दिया जा सकता था, लेकिन इसके बजाय व्याख्याता को जिम्मेदारी सौंप दी गई। इससे विद्यालय में विषय विशेषज्ञ की कमी और अधिक बढ़ गई।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में कलेक्टर कार्यालय के आदेश के बाद संबंधित व्याख्याता को कार्यमुक्त भी किया गया था। इसके बावजूद मूल विद्यालय में पदभार ग्रहण नहीं होने को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि कार्यमुक्ति आदेश जारी हो चुका था, तो उसके पालन में देरी क्यों हुई।

इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका को लेकर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के बावजूद संलग्नीकरण जारी रहने से विभागीय नियमों का पालन नहीं हो पाया। वहीं विद्यालय के कमजोर परीक्षा परिणाम के लिए अब तक किसी अधिकारी या संस्था प्रमुख की जवाबदेही तय नहीं की गई है।

फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग इस मामले में स्पष्टीकरण जारी करता है या कोई कार्रवाई करता है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों की मांग है कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर कर शैक्षणिक व्यवस्था को शीघ्र सामान्य बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा परिणाम में सुधार हो सके।