बच्चों की मौतों से उबाल, आदिवासी समाज ने कराया बालाघाट बंद, कलेक्ट्रेट के सामने किया प्रदर्शन
बालाघाट के बिरसा ब्लॉक में बच्चों की मौतों के मामले को लेकर आदिवासी समाज ने बालाघाट बंद का आह्वान किया। बंद का बाजारों में असर दिखाई दिया। इसके बाद आदिवासी संगठनों ने शहर में रैली निकालकर कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया और मामले की गंभीरता से जांच, जिम्मेदारी तय करने तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग प्रशासन के सामने रखी।
UNITED NEWS OF ASIA. सायमा नाज, बालाघाट l बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में बच्चों की मौतों का मामला अब आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। बच्चों की मौतों को लेकर आदिवासी समुदाय ने बालाघाट बंद का आह्वान किया, जिसका शहर में व्यापक असर देखने को मिला। सुबह से ही बाजारों में कई दुकानें बंद रहीं और सामान्य दिनों की तुलना में सड़कों पर आवाजाही कम नजर आई। बंद के दौरान आदिवासी संगठनों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में बालाघाट पहुंचे और पूरे मामले को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं।
बताया गया कि बंद के बाद आदिवासी संगठनों की ओर से शहर में रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और हाथों में तख्तियां तथा बैनर लेकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। रैली के दौरान बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौतों के साथ ही आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सवाल भी प्रमुखता से उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां आदिवासी संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया। इस दौरान मंच के माध्यम से वक्ताओं ने बच्चों की मौतों के मामले में प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
आदिवासी संगठनों ने अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखते हुए कहा कि बच्चों की मौतों के मामले को केवल जांच तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि जांच के साथ-साथ स्वास्थ्य व्यवस्था में आवश्यक सुधार और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, उपचार व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए।
बालाघाट बंद के दौरान शहर के अलग-अलग बाजार क्षेत्रों में इसका असर दिखाई दिया। कई व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि बंद के समर्थन में आदिवासी समाज के लोग अलग-अलग क्षेत्रों से शहर पहुंचे। दोपहर तक आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां जारी रहीं। इसके बाद रैली के रूप में प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और वहां अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान बिरसा ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश पेंडाम ने बच्चों की मौतों के मामले को गंभीर बताते हुए आदिवासी समाज की मांगों को सामने रखा। वहीं प्रशासन की ओर से अपर कलेक्टर बालाघाट डीके बर्मन ने प्रदर्शनकारियों से जुड़े विषयों और उनकी मांगों को लेकर प्रशासन का पक्ष रखा। आंदोलन के बीच प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद भी महत्वपूर्ण रहा।
बच्चों की मौतों को लेकर सामने आए इस आंदोलन के बाद अब पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई और जांच की दिशा पर लोगों की नजर है। आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे मामले में जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग को प्रमुखता से उठा रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से मामले में आगे की प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।