कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि सखियों का 5 दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण सम्पन्न, सांसद विवेक साहू ने किसानों तक ज्ञान पहुँचाने का दिया संदेश
छिंदवाड़ा कृषि विज्ञान केंद्र में 44 कृषि सखियों का 5 दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण सम्पन्न। सांसद विवेक साहू ने किसानों तक ज्ञान पहुँचाने और जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
UNITED NEWS OF ASIA. वीरान लाल यादव, छिंदवाड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र, चंदनगाव में छिंदवाड़ा एवं पांढुर्ना जिले के छह विकासखंडों की 44 चयनित कृषि सखियों का राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत पांच दिवसीय प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र एवं परियोजना संचालक (आत्मा), किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सांसद विवेक (बंटी) साहू ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी प्राकृतिक खेती के अग्रदूत हैं और अपने ज्ञान के माध्यम से किसानों को जागरूक कर खेत-खेत तक प्राकृतिक खेती का संदेश पहुँचाएं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे सीखे हुए तकनीकों को अपने क्षेत्र में सक्रिय रूप से लागू करें और अन्य किसानों को भी लाभान्वित करें।
कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायण ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज के समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण आयाम है। उन्होंने कृषि सखियों से कहा कि मृदा स्वास्थ्य सुधारने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में उनका योगदान अनिवार्य है। जिला भाजपा अध्यक्ष श्री शेषराव यादव ने भी प्रशिक्षणार्थियों को प्राकृतिक घटकों और दवाइयों के सही उपयोग को जन-जन तक पहुँचाने की जिम्मेदारी याद दिलाई।
उपसंचालक कृषि श्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रत्येक कृषि सखी कम से कम 125 किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों में प्रशिक्षित करेगी, जिससे व्यापक स्तर पर खेती में सुधार संभव होगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. डी. सी. श्रीवास्तव ने प्रशिक्षण की विभिन्न गतिविधियों और तकनीकों की जानकारी दी।
प्रशिक्षणार्थी उमा डांगे ने कहा कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण में उन्होंने प्राकृतिक खेती की विधियों को सीखा और अब वे कम लागत में किसानों को लाभ कमाने के तरीकों से अवगत कराएँगी।
समापन समारोह में अतिथियों द्वारा प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन और प्राकृतिक खेती प्रदर्शन ईकाई का शुभारंभ किया गया। सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर जिले के कृषि विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने क्षेत्रीय किसानों में प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत कृषि प्रथाओं को अपनाने का मार्ग प्रशस्त किया।