मजदूर परिवार में जन्मे विक्रम के लिए जीवन की शुरुआत काफी कठिन रही। वह जन्मजात कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट) की समस्या से पीड़ित था। इस वजह से उसे भोजन करने में दिक्कत होती थी और उसकी बोलचाल भी साफ नहीं थी। शारीरिक परेशानी के साथ-साथ सामाजिक झिझक भी उसे परेशान करती थी। गांव के अन्य बच्चों के बीच वह अक्सर खुद को असहज महसूस करता और अपना चेहरा छिपाकर रहता था।
विक्रम की जिंदगी में बदलाव तब आया जब शासन की Chirayu Yojana के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम आंगनवाड़ी जांच के लिए गांव पहुंची। जांच के दौरान चिरायु दल के सदस्यों ने विक्रम की समस्या की पहचान की और उसके पिता Narsing Kashyap को बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया।
शुरुआत में परिवार को ऑपरेशन को लेकर कई आशंकाएं थीं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की संवेदनशीलता और लगातार संवाद के बाद परिवार इलाज के लिए तैयार हो गया। इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र Lohandiguda के खंड चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में विक्रम को बेहतर इलाज के लिए राजधानी Raipur के Medishine Hospital में भर्ती कराया गया।
रायपुर में विशेषज्ञ शल्य चिकित्सकों की टीम ने विक्रम की सफल सर्जरी की। ऑपरेशन के माध्यम से उसके कटे हुए होंठ और तालु को ठीक किया गया। कुछ ही हफ्तों के भीतर जब विक्रम वापस अपने गांव लौटा तो वहां का माहौल बदल चुका था।
जो बच्चा पहले झिझक के कारण अपना चेहरा छिपाकर चलता था, अब वही बच्चा आत्मविश्वास के साथ सबके सामने मुस्कुराता हुआ दिखाई देता है। अब विक्रम स्पष्ट शब्दों में अपने परिवार से बातचीत करता है और घर के छोटे-मोटे कामों में भी अपनी मां का हाथ बंटाता है।
विक्रम के पिता नरसिंग कश्यप कहते हैं कि चिरायु योजना उनके बेटे के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली चिकित्सा सहायता से उनके बेटे का जीवन पूरी तरह बदल गया।
विक्रम की यह कहानी बस्तर के दूरस्थ वनांचल से निकलकर यह संदेश देती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो और प्रशासन संवेदनशीलता के साथ काम करे, तो समाज के सबसे दूरदराज इलाकों तक भी उम्मीद और खुशियों की रोशनी पहुंच सकती है।