दुर्ग की तीन पंचायतें बनीं ‘लखपति ग्राम’, महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम

दुर्ग जिले की तीन ग्राम पंचायतों ने ‘लखपति ग्राम’ बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों से सालाना एक लाख रुपये से अधिक आय अर्जित कर रही हैं। ग्राम सभाओं में इसके लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है।

Jun 11, 2026 - 18:09
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दुर्ग की तीन पंचायतें बनीं ‘लखपति ग्राम’, महिला सशक्तिकरण की मिसाल कायम

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l दुर्ग जिले की तीन ग्राम पंचायतों ने आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ‘लखपति ग्राम’ बनने की ओर कदम बढ़ाया है। पाटन विकासखंड की बोरेंदा, धमधा विकासखंड की पथरिया डी और दुर्ग विकासखंड की खपरी सि ग्राम पंचायतों में आयोजित ग्राम सभाओं में सर्वसम्मति से ‘लखपति ग्राम’ बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

यह पहल बिहान योजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इन समूहों की महिलाएं कृषि, पशुपालन, मुर्गी पालन, सब्जी उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर लगातार अपनी आय बढ़ा रही हैं।

इन प्रयासों का परिणाम यह है कि कई महिला सदस्य अब प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में आ रही हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि परिवार और समाज में उनकी भूमिका भी और अधिक मजबूत हुई है।

विशेष ग्राम सभा का आयोजन 5 जून को किया गया था, जिसमें ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई। ग्राम सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने इस पहल का समर्थन करते हुए इसे गांव के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस पूरे अभियान को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। उनके नेतृत्व में महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बैंक ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें और अधिक आय अर्जित कर सकें।

जिला प्रशासन द्वारा यह भी बताया गया है कि अब एक जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जो इन ग्राम पंचायतों में महिलाओं की आय का सत्यापन करेगी। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इन पंचायतों को आधिकारिक रूप से ‘लखपति ग्राम’ की मान्यता दी जाएगी।

यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल होता है तो इसे जिले के अन्य ग्राम पंचायतों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे व्यापक स्तर पर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन देखने को मिलेगा।