स्लग-घर से रेस्क्यू किए गए तेंदुए की मुक्की में मौत,उठे कई सवाल

बिछिया क्षेत्र के ग्राम खटोला से रेस्क्यू किए गए तेंदुए की मुक्की वन परिक्षेत्र में मौत हो गई। वन विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में तेंदुआ आपसी संघर्ष में घायल था और पोस्टमार्टम में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के लक्षण नहीं मिले हैं। मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत पोस्टमार्टम और अन्य वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

Jul 26, 2026 - 15:23
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स्लग-घर से रेस्क्यू किए गए तेंदुए की मुक्की में मौत,उठे कई सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. बिछिया। जिले के बिछिया क्षेत्र के ग्राम खटोला से रेस्क्यू किए गए तेंदुए की मुक्की वन परिक्षेत्र में उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना के सामने आने के बाद वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, ग्राम खटोला में एक तेंदुआ ग्रामीण के घर में घुस गया था। सूचना मिलने पर कान्हा टाइगर रिजर्व की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी के साथ तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) कर सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद उसे उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के लिए मुक्की वन परिक्षेत्र भेजा गया था।

रेस्क्यू के बाद उम्मीद की जा रही थी कि उपचार के पश्चात तेंदुए की स्थिति में सुधार होगा, लेकिन अगले ही दिन उसकी मौत की खबर सामने आई। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मुक्की भेजे गए वन्यजीवों की मौत की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वन विभाग ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

मामले को लेकर जब मुक्की के एसडीओ वीरेंद्र जमोर से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार तेंदुआ पहले से ही आपसी संघर्ष में घायल था। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के दौरान कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं। इससे यह संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है कि मौत किसी वायरल संक्रमण के कारण हुई हो।

वन विभाग का कहना है कि केवल प्रारंभिक निरीक्षण के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इसलिए तेंदुए के शव का विधिवत पोस्टमार्टम कराया गया है और आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण भी किए जा रहे हैं। इन जांच रिपोर्टों के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी रेस्क्यू किए गए वन्यजीव की मौत कई कारणों से हो सकती है। इनमें पहले से लगी गंभीर चोटें, अत्यधिक तनाव, आंतरिक रक्तस्राव, संक्रमण या अन्य चिकित्सकीय जटिलताएं शामिल हो सकती हैं। इसलिए विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बिना किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं माना जाता।

इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था और रेस्क्यू के बाद की चिकित्सा प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है। स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों की नजर अब विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि तेंदुए की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

फिलहाल वन विभाग मामले की जांच जारी रखे हुए है और अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक विश्लेषण तथा अन्य वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाएगा। जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की अटकलों से बचने की अपील भी की गई है।