उभेगांव पंचायत में कथित भ्रष्टाचार की लंबी फेहरिस्त, मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
छिंदवाड़ा की ग्राम पंचायत उभेगांव में विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। जन-विश्वास कार्यक्रम के दौरान पंचायत के पंचों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र सौंपकर विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत में मशरूम सेंटर, अमृत सरोवर, नल-जल योजना की मरम्मत, फिश पार्लर, तालाब और आंगनवाड़ी भवन सहित कई कार्यों का उल्लेख किया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञ राज पटेल, छिंदवाड़ा l ग्राम पंचायत उभेगांव में विकास कार्यों के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। 7 अगस्त को मुख्यमंत्री के जन-विश्वास अभियान के तहत छिंदवाड़ा पहुंचने के दौरान उभेगांव के पंचों के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर शिकायत पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने पंचायत में कराए गए विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पंचों ने मुख्यमंत्री को सौंपे शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि खर्च की गई, लेकिन कुछ कार्यों की गुणवत्ता, उपयोगिता और खर्च की गई राशि को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत में मशरूम निर्माण केंद्र, अमृत सरोवर तालाब, नल-जल योजना की मरम्मत, फिश पार्लर निर्माण, पंचायत भवन के पीछे मोक्षधाम के पास तालाब निर्माण और आंगनवाड़ी भवन सहित कई कार्यों का उल्लेख किया गया है।
कागजों पर विकास, जमीन पर सवाल
पंचों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत सरकारी धन के उपयोग में अपेक्षित पारदर्शिता नहीं बरती गई। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने कुछ कार्यों की वास्तविक स्थिति तथा निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं।
पंचों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि प्रत्येक कार्य की स्वीकृत राशि, तकनीकी स्वीकृति, भुगतान, निर्माण गुणवत्ता और मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि जिन कार्यों के लिए सरकारी राशि स्वीकृत की गई, वे निर्धारित मापदंडों के अनुसार पूरे हुए हैं या नहीं।
पहले भी शिकायतों का किया गया दावा
शिकायत पत्र में पंचों ने यह भी बताया कि संबंधित मामलों को लेकर पूर्व में विभागीय अधिकारियों के समक्ष कई बार लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके अलावा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराने का दावा किया गया है।
पंचों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद अपेक्षित स्तर पर जांच और कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष पूरा मामला उठाया है। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए जाएंगे।
जांच और कार्रवाई की मांग
पंचों ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच किसी सक्षम एवं स्वतंत्र जांच एजेंसी अथवा वरिष्ठ अधिकारियों की टीम से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान पंचायत के संबंधित विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृतियां, भुगतान रिकॉर्ड और मौके पर निर्माण की स्थिति की जांच की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों से सरकारी राशि की नियमानुसार वसूली की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है। मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत के विकास कार्यों में वास्तव में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।