माध्यमिक शाला कोंगेरा के निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति चिंताजनक सामने आई। विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थ होने के बावजूद निरीक्षण के समय केवल एक शिक्षक उपस्थित मिला, जबकि दो शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। राकेश उसेंडी ने बच्चों से सामान्य ज्ञान और पढ़ाई से जुड़े कई सवाल पूछे। इस दौरान बच्चों के जवाब संतोषजनक नहीं रहे। उन्होंने बच्चों से नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक और वन मंत्री का नाम भी पूछा, जिसका बच्चे जवाब नहीं दे सके।
इस स्थिति पर राकेश उसेंडी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति बेहद जरूरी है। यदि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंचेंगे और बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाएगा तो इसका असर उनके भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में केवल मध्याह्न भोजन की व्यवस्था होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राकेश उसेंडी ने कहा कि शिक्षक स्कूल आएं, अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं और इसके बाद चले जाएं, ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती। बच्चों की पढ़ाई और उनके शैक्षणिक स्तर की नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि विद्यालयों में शिक्षा का स्तर किस दिशा में जा रहा है।
प्राथमिक शाला झारा में निरीक्षण के दौरान एक शिक्षक और एक अतिथि शिक्षक उपस्थित मिले। यहां बच्चों से पढ़ाई से संबंधित सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने तुरंत और सही जवाब दिया। स्कूल में बच्चों की शैक्षणिक स्थिति संतोषजनक पाए जाने पर राकेश उसेंडी ने शिक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।
इसी तरह प्राथमिक शाला मुंडपाल और माध्यमिक शाला मुंडपाल में भी बच्चों से विभिन्न विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे गए। बच्चों ने पूछे गए सवालों के संतोषजनक जवाब दिए। इन दोनों विद्यालयों में भी पढ़ाई की स्थिति बेहतर पाई गई।
राकेश उसेंडी ने कहा कि नारायणपुर जिले के सभी क्षेत्रों में शासकीय स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा। जिन विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई में कमजोरी या शिक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही सामने आएगी, उस मामले को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाकर आवश्यक कार्रवाई के लिए पहल की जाएगी।
उन्होंने जिले के सभी संकुल समन्वयकों से भी अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल विद्यालय का निरीक्षण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों से सीधे बातचीत कर यह जानना भी जरूरी है कि उन्हें कक्षा में पढ़ाई किस तरह कराई जा रही है और वे विषयों को कितना समझ पा रहे हैं।
राकेश उसेंडी ने कहा कि बच्चों का भविष्य शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सभी संबंधित लोगों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्कूलों का निरीक्षण आगे भी लगातार जारी रहेगा।