राष्ट्रीय आदिवासी साहित्य महोत्सव में छिंदवाड़ा के साहित्यकारों ने बढ़ाया जिले का गौरव
भोपाल में आयोजित प्रथम अखिल भारतीय राष्ट्रीय आदिवासी साहित्य महोत्सव में छिंदवाड़ा जिले के तामिया और पातालकोट से पहुंचे लेखक, गीतकार एवं लोकगायक सुखदयाल अंगारे और माखनलाल भारती ने भरिया जनजाति की संस्कृति और साहित्य का प्रतिनिधित्व किया। दोनों साहित्यकारों को उत्कृष्ट लेखन एवं गायन के लिए 'आदिवासी गौरव सम्मान' से सम्मानित किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. वीरेंद्र यादव, छिंदवाड़ा l मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मेनिट) के सिविल ऑडिटोरियम में 28 जून को प्रथम अखिल भारतीय राष्ट्रीय आदिवासी साहित्य महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। देशभर के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी साहित्यकारों, कवियों, गीतकारों, चिंतकों, शोधकर्ताओं और संस्कृति प्रेमियों की उपस्थिति में आयोजित यह सम्मेलन आदिवासी साहित्य, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
इस ऐतिहासिक साहित्यिक आयोजन में छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड तामिया का भी गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व देखने को मिला। तामिया के लेखक, गीतकार एवं लोकगायक सुखदयाल अंगारे तथा उनके शिष्य, पातालकोट निवासी लेखक, गीतकार, लोकगायक और भरिया टी बोली के जानकार माखनलाल भारती ने भरिया जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
महोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे लगभग 150 साहित्यकारों और रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं, कविताओं, लोकगीतों और विचारों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर सुखदयाल अंगारे और माखनलाल भारती ने अपनी स्वरचित रचनाओं और लोकगीतों के माध्यम से भरिया जनजाति की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जीवन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित साहित्यकारों, विद्वानों और श्रोताओं ने खूब सराहा।
उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए दोनों साहित्यकारों को 'आदिवासी गौरव सम्मान' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छिंदवाड़ा जिले, तामिया क्षेत्र और भरिया जनजाति के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है।
सुखदयाल अंगारे लंबे समय से आदिवासी समाज की संस्कृति, लोकगीतों और परंपराओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। वहीं माखनलाल भारती भरिया जनजाति की टी बोली के संरक्षण, लोकगीतों के प्रचार-प्रसार और साहित्य सृजन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान क्षेत्र के युवा साहित्यकारों और कलाकारों के लिए भी प्रेरणास्रोत मानी जा रही है।
महोत्सव का उद्देश्य देशभर की आदिवासी भाषाओं, लोक साहित्य, संस्कृति और परंपराओं को एक साझा मंच प्रदान करना तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था। इस आयोजन ने विभिन्न जनजातीय समुदायों के साहित्यकारों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर भी उपलब्ध कराया।
राष्ट्रीय मंच पर छिंदवाड़ा जिले की भरिया जनजाति का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व और दोनों साहित्यकारों को मिला सम्मान जिले के लिए गौरव का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।