स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र की कुछ शासकीय मदिरा दुकानों, विशेषकर बड़कुई वाइन शॉप से जुड़े लोगों द्वारा कथित तौर पर घर-घर शराब पहुंचाई जा रही है। नागरिकों के अनुसार, फोन के माध्यम से शराब की मांग किए जाने के बाद उसे संबंधित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है।
आरोपों के मुताबिक, अंदरूनी क्षेत्रों में शराब की कथित सप्लाई के लिए सफेद रंग की एक बोलेरो का नियमित इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वाहन की खिड़कियों पर काली फिल्म लगी हुई है और इसी के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में शराब पहुंचाई जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नागरिकों का यह भी कहना है कि शराब की कथित अवैध बिक्री और होम डिलीवरी से क्षेत्र में नशे की समस्या को बढ़ावा मिलने की आशंका है। उनका सवाल है कि यदि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले पुलिस प्रशासन की ओर से नशे के दुष्प्रभावों को लेकर “नशे से दूरी है जरूरी” जैसे जागरूकता अभियान चलाए गए थे। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जागरूकता अभियानों के साथ-साथ अवैध शराब की बिक्री और परिवहन पर प्रभावी निगरानी भी जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शासकीय मदिरा दुकानों से कथित होम डिलीवरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही शराब के अवैध परिवहन, बिक्री या अन्य नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में स्पष्ट जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए, ताकि क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार को लेकर बनी आशंकाओं का समाधान हो सके। साथ ही नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।