अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक MODAFL ईरान के सशस्त्र बलों के लिए हथियारों के शोध, उत्पादन और खरीद से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। विभाग का कहना है कि उसके नेटवर्क के जरिए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों से जुड़ी गतिविधियों को भी समर्थन मिलता है। अमेरिका ने इसी नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग देशों में मौजूद व्यक्तियों और कंपनियों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया है।
इस कार्रवाई में पाकिस्तान से जुड़े Waseem Pasha Tajammal और उनकी कंपनियों का भी नाम शामिल है। अमेरिकी ट्रेजरी का आरोप है कि Tajammal और Cavalier Group ने MODAFL के लिए हथियारों की खरीद और वितरण में तीसरे पक्ष के मध्यस्थ के रूप में काम किया। पाकिस्तान स्थित Cavalier Dynamics Private Limited के अलावा सऊदी अरब और तुर्की से जुड़ी कंपनियों को भी कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।
वहीं, ईरान और हांगकांग से जुड़े नेटवर्क पर भी अमेरिकी कार्रवाई हुई है। ट्रेजरी के अनुसार ईरान स्थित Kavoshcom Asia R and D Group ने ईरान के विमान निर्माण और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी संस्थाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कनेक्टर हासिल किए। हांगकांग स्थित EC Mojo Technology Co Limited पर इन खरीद प्रयासों में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने कहा कि अमेरिका ईरानी शासन को समर्थन देने वालों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की कार्रवाई जारी रखेगा। ट्रेजरी के अनुसार प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान की हथियार संबंधी क्षमता को दोबारा मजबूत करने की क्षमता को कमजोर करना और उसकी सैन्य खरीद में मदद करने वालों की लागत बढ़ाना है।
प्रतिबंधों के तहत अमेरिका में मौजूद या अमेरिकी व्यक्तियों के नियंत्रण में आने वाली नामित संस्थाओं की संपत्तियां ब्लॉक की जाती हैं और अमेरिकी व्यक्तियों के लिए इनके साथ कई तरह के लेनदेन प्रतिबंधित हो जाते हैं। विदेशी वित्तीय संस्थाओं पर भी कुछ परिस्थितियों में अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम हो सकता है।
इसी बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। 29 सितंबर को ईरानी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और खुले बाजार में एक डॉलर के लिए 25 लाख से अधिक रियाल का कारोबार हुआ। यह गिरावट लंबे समय से जारी आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय संघर्ष के बीच सामने आई है।
अमेरिका की ताजा कार्रवाई को ईरान की सैन्य खरीद और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया गया है। हालांकि, प्रतिबंधों के वास्तविक दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन आगे की परिस्थितियों और ईरान की प्रतिक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।