ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया के बह जाने के बाद उन्होंने इसकी जानकारी संबंधित प्रशासन को कई बार दी। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने खुद ही पुलिया पर काम शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने श्रमदान करते हुए पुलिया को आवागमन के लायक बनाने का प्रयास शुरू किया।
आवागमन की परेशानी के चलते उठाया कदम
पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के कारण गढ़ी से सूपखार जाने वाले मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हो रही थी। ग्रामीणों के लिए यह मार्ग दैनिक आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में बारिश के बाद पुलिया के बह जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन से समस्या के समाधान की उम्मीद के बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उन्होंने सामूहिक रूप से श्रमदान करने का फैसला लिया। ग्रामीणों के इस प्रयास से पुलिया को फिलहाल पैदल और स्थानीय आवागमन के लिए उपयोगी बनाने की कोशिश की जा रही है।
कुछ महीने पहले कराया गया था पुलिया का काम
ग्रामीणों के अनुसार, इसी पुलिया का काम कुछ महीने पहले कराया गया था। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब मुख्यमंत्री मोहन यादव गढ़ी के सूपखार पहुंचे थे, उस दौरान इस पुलिया के कार्य और सड़क पर मौजूद गड्ढों को भरने का काम कराया गया था।
ग्रामीणों का दावा है कि सड़क और पुलिया से जुड़े कार्यों के लिए एमपीआरडीसी द्वारा लाखों रुपये का भुगतान भी किया गया था। हालांकि, बरसात के दौरान वही पुलिया बह गई। पुलिया के दोबारा क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी
प्रशासन की ओर से तत्काल मरम्मत नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अब खुद ही पुलिया को चलने योग्य बनाने की जिम्मेदारी संभाली है। श्रमदान के जरिए ग्रामीण पुलिया पर काम कर रहे हैं, ताकि आवागमन दोबारा सुचारू हो सके।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग पुलिया की स्थिति का स्थायी समाधान करे और बरसात में दोबारा ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए आवश्यक निर्माण कार्य कराया जाए। वहीं, पुलिया के पूर्व में हुए निर्माण कार्य और उसके बाद बारिश में हुए नुकसान की तकनीकी जांच की आवश्यकता पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।