इसी क्रम में कलेक्टर तुलिका प्रजापति के निर्देशानुसार जिला पंचायत कबीरधाम के सभाकक्ष में सभी कार्यक्रम अधिकारियों, तकनीकी सहायकों और अन्य मैदानी कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों को ग्राम पंचायत स्तर पर विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
2 अक्टूबर की ग्राम सभा से शुरू होगी योजना निर्माण प्रक्रिया
कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने बताया कि 2 अक्टूबर को आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं के माध्यम से योजना निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। ग्रामीण अपने गांव की जरूरतों, रोजगार और आजीविका के अवसरों की पहचान कर विकास की प्राथमिकताएं तय करने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से हो और ग्रामीणों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो, इसके लिए मैदानी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने जिले के ग्रामीणों से 2 अक्टूबर की ग्राम सभा में शामिल होकर गांव के विकास प्लान को तैयार करने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
सशक्तिकरण और विकास पर रहेगा जोर
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम अभिषेक अग्रवाल ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सशक्तिकरण, विकास, अभिसरण और संतृप्ति के आधार पर कार्य करने की आवश्यकता है।
उन्होंने जीपीडीपी के साथ वीजीपीपी के पांच चरणों के अनुसार समयबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए। सितंबर महीने में ग्राम सभा पूर्व गतिविधियों के तहत मैदानी अमले की क्षमता निर्माण की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। इसके बाद 2 अक्टूबर की ग्राम सभा में ग्रामीणों द्वारा निर्माण कार्यों की प्राथमिकता तय की जाएगी।
अक्टूबर से नवंबर के बीच परामर्श और प्रविष्टियों के साथ कार्यों का मानचित्रण किया जाएगा। दिसंबर में प्रारूप को ग्राम सभा के माध्यम से अंतिम रूप देने तथा 15 जनवरी तक सभी योजनाओं का संकलन कर समेकित प्लान तैयार करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
रोजगार और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप होंगे कार्य
अभिषेक अग्रवाल ने मैदानी कर्मचारियों को ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों की मांग के अनुसार श्रममूलक कार्यों की स्वीकृति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
तकनीकी कारणों से लंबित ई-केवाईसी को पूरा करने, कार्यों का मूल्यांकन ई-एमबी में करने और युक्तधारा के माध्यम से कार्यों का चिन्हांकन करने के निर्देश भी दिए गए।
कार्यशाला में विनायक गुप्ता, अशोक झरिया, बृजेश गुप्ता सहित योजना से जुड़े कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक, प्रोग्रामर और अन्य कार्यालय स्टाफ उपस्थित रहे।