पैसों के बदले कंटेंट प्रमोशन पर सरकार सख्त, मेटा की कानूनी सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट हटाए जाने के विवाद के बाद भारत सरकार और मेटा के बीच तनाव जारी है। सरकार ने कंटेंट मॉडरेशन, डीपफेक और पेड प्रमोशन को लेकर कंपनी से जवाब मांगा है। साथ ही भारतीय भाषाओं और स्थानीय परिस्थितियों को समझने वाली ह्यूमन ओवरसाइट बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का पालन नहीं होने पर मेटा को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

Aug 8, 2026 - 15:24
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पैसों के बदले कंटेंट प्रमोशन पर सरकार सख्त, मेटा की कानूनी सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

UNITED NEWS OF ASIA. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाए जाने के बाद भारत सरकार और सोशल मीडिया कंपनी मेटा के बीच विवाद अब एक बड़े कानूनी और तकनीकी मुद्दे में बदलता नजर आ रहा है। सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन, पेड प्रमोशन, डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार सामग्री को लेकर कंपनी से जवाब मांग रही है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल मेटा को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स की ओर से पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ परिस्थितियों में कानूनी सुरक्षा मिलती है। हालांकि, यह सुरक्षा निर्धारित कानूनी शर्तों और ड्यू डिलिजेंस का पालन करने पर निर्भर करती है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने एल्गोरिदम के जरिए यह तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा और पैसे लेकर किसी सामग्री की पहुंच बढ़ाई जाती है, तो प्लेटफॉर्म की भूमिका को लेकर कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्लेटफॉर्म को केवल एक मध्यस्थ के बजाय कंटेंट के प्रकाशन में सक्रिय भूमिका निभाने वाला माना जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट से जुड़े विवाद के बाद मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान की टीम ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की थी। इसके बाद कंपनी की ओर से इस घटना को लेकर खेद जताए जाने की बात सामने आई। संसदीय स्थायी समिति ने भी मामले को गंभीरता से लिया था।

बैठकों के दौरान सरकार ने डीपफेक और एआई से तैयार हानिकारक सामग्री को लेकर भी मेटा से सवाल किए। सरकार ने पूछा कि रिपोर्ट किए जाने के बावजूद ऐसी सामग्री दोबारा प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई देती है। साथ ही एआई या सिंथेटिक कंटेंट पर अनिवार्य लेबलिंग से जुड़े नियमों के पालन को लेकर भी जवाब मांगा गया।

सरकार ने मेटा को केवल ऑटोमेटेड सिस्टम और एआई आधारित मॉडरेशन पर निर्भर नहीं रहने की सलाह दी है। भारतीय भाषाओं, स्थानीय परिस्थितियों और सांस्कृतिक संदर्भों को बेहतर तरीके से समझने वाली मानव मॉडरेशन टीमों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

सरकार का मानना है कि भारतीय भाषाओं में आपत्तिजनक, भ्रामक या हानिकारक सामग्री की पहचान के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर मानवीय निगरानी जरूरी है। ऐसे में आने वाले समय में मेटा के कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और कानूनी जिम्मेदारियों को लेकर सरकार की निगरानी और सख्त हो सकती है।

हालांकि, सेफ हार्बर सुरक्षा वास्तव में किस हद तक प्रभावित होगी, यह संबंधित कानूनी प्रावधानों, कंपनी के अनुपालन और आगे की सरकारी कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल मेटा और भारत सरकार के बीच बातचीत का दौर जारी है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही का मुद्दा केंद्र में बना हुआ है।