सहायक उपकरण की आस में आए पिता को मिली बेटे के बेहतर भविष्य की राह, शिविर में हुई काउंसलिंग

सेवा संकल्प अभियान के तहत भाटापारा में आयोजित दिव्यांगजन शिविर में ग्राम कुकदा निवासी शेष नारायण धृतलहरे अपने 10 वर्षीय बहुदिव्यांग बेटे कौशिक के लिए सहायक उपकरण की उम्मीद लेकर पहुंचे। शिविर में समाज कल्याण विभाग की उप संचालक सिनीवाली गोयल ने उनकी काउंसलिंग कर विशेष शिक्षण-प्रशिक्षण और उपचार के लिए उपलब्ध शासकीय सुविधाओं की जानकारी दी। मार्गदर्शन मिलने के बाद शेष नारायण को बेटे के बेहतर भविष्य को लेकर नई उम्मीद मिली।

Sep 22, 2026 - 17:32
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सहायक उपकरण की आस में आए पिता को मिली बेटे के बेहतर भविष्य की राह, शिविर में हुई काउंसलिंग

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l सेवा संकल्प अभियान के तहत भाटापारा में आयोजित दिव्यांगजन शिविर में अपने 10 वर्षीय बहुदिव्यांग बेटे के लिए सहायक उपकरण की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्राम कुकदा निवासी शेष नारायण धृतलहरे को बेटे के बेहतर भविष्य के लिए नई राह मिली। शिविर में समाज कल्याण विभाग की उप संचालक सिनीवाली गोयल ने शेष नारायण की विस्तार से काउंसलिंग की और उन्हें बेटे के विशेष शिक्षण-प्रशिक्षण एवं उपचार के लिए उपलब्ध शासकीय सुविधाओं की जानकारी दी।

शेष नारायण अपने बेटे कौशिक धृतलहरे को लेकर शिविर पहुंचे थे। कौशिक बहुदिव्यांग बालक है और उसकी देखभाल के लिए परिवार को विशेष ध्यान देना पड़ता है। शेष नारायण की चिंता केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे बेटे की शिक्षा, प्रशिक्षण, उपचार और उसके भविष्य को लेकर भी चिंतित थे। शिविर में हुई काउंसलिंग के दौरान उनकी इन चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

उन्हें बताया गया कि रायपुर के माना कैंप स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित बहुदिव्यांग केंद्र में दिव्यांग बच्चों की देखभाल के साथ विशेष शिक्षण-प्रशिक्षण एवं उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस जानकारी से शेष नारायण को अपने बेटे के लिए आगे की आवश्यक सुविधाओं को लेकर एक विकल्प मिला। उन्हें बेटे को केंद्र में ले जाकर उपलब्ध सेवाओं का लाभ लेने के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया गया।

शेष नारायण ने बताया कि उनके तीन बच्चे सामान्य हैं और एक बेटा दिव्यांग है। बेटे की विशेष देखभाल के कारण उन्हें काफी समय उसकी जरूरतों के लिए देना पड़ता था। इस वजह से अन्य बच्चों पर पर्याप्त समय और ध्यान नहीं दे पाने की चिंता भी उनके मन में रहती थी। अब उन्हें उम्मीद है कि माना कैंप, रायपुर स्थित केंद्र में बेटे को आवश्यक उपचार, विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण की सुविधाएं मिल सकेंगी।

शेष नारायण ने कहा कि वे अपने बेटे को माना कैंप जरूर लेकर जाएंगे, ताकि उसे आवश्यक सुविधाएं मिल सकें और उसके जीवन को बेहतर बनाने में मदद हो। उनके लिए शिविर केवल सहायक उपकरण की जानकारी पाने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि बेटे की शिक्षा, उपचार और प्रशिक्षण से जुड़ी आगे की संभावनाओं की जानकारी मिलने का अवसर भी बना।

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित दिव्यांगजन शिविरों में हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी देने के साथ उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार काउंसलिंग भी की जा रही है। शिविरों के माध्यम से दिव्यांगजनों और उनके परिजनों की संबंधित अधिकारियों तक सीधी पहुंच बन रही है। इससे उन्हें योजनाओं के साथ उपचार, विशेष शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास से जुड़ी उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी मिल रही है।