स्वीकृत कार्यों के दायरे में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां और कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। इन सभी 7 केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण के साथ परिसर के समतलीकरण का कार्य किया जाएगा। प्रत्येक केंद्र के लिए 9.94 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इस तरह सभी केंद्रों के लिए स्वीकृत राशि मिलाकर 69.58 लाख रुपये होती है।
धान उपार्जन केंद्रों में फड़ का निर्माण और परिसर का समतलीकरण उपार्जन प्रक्रिया से जुड़ी बुनियादी व्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। धान की आवक के दौरान किसानों द्वारा अपनी उपज केंद्रों तक लाई जाती है। ऐसे में व्यवस्थित और समतल स्थान उपलब्ध होने से धान को रखने तथा खरीदी से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में सुविधा मिल सकती है। प्रस्तावित निर्माण कार्यों का उद्देश्य इन केंद्रों की मौजूदा अधोसंरचना को बेहतर बनाना है।
क्षेत्र के इन 7 केंद्रों पर पक्के फड़ बनने से उपार्जन व्यवस्था के लिए स्थायी आधारभूत सुविधा तैयार होगी। वहीं समतलीकरण कार्य से केंद्र परिसर को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। धान की खरीदी और रख-रखाव के दौरान केंद्रों पर आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को कम करने की दिशा में भी इन कार्यों को उपयोगी माना जा रहा है।
किसानों के लिए धान उपार्जन केंद्र तक उपज पहुंचाने के बाद खरीदी प्रक्रिया पूरी होने तक बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध होना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में केंद्रों की अधोसंरचना को मजबूत करने से उपार्जन प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहायता मिल सकती है। स्वीकृत कार्यों के जरिए क्षेत्र के सात केंद्रों को आवश्यक बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़ी अधोसंरचना को मजबूत करने के क्रम में यह स्वीकृति महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है। पक्के फड़ और समतलीकरण के कार्य पूरे होने के बाद संबंधित केंद्रों पर धान उपार्जन से जुड़ी गतिविधियों के संचालन के लिए बेहतर भौतिक सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित वातावरण मिलने की उम्मीद है।
स्वीकृत 69.58 लाख रुपये की राशि से होने वाले इन कार्यों के माध्यम से टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां और कुर्रीडीह के धान उपार्जन केंद्रों की आधारभूत संरचना को विकसित किया जाएगा। किसान सुविधा और उपार्जन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इन कार्यों को क्षेत्र की कृषि अधोसंरचना से जोड़कर देखा जा रहा है।