Delhi Pollution: प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत बोले- वाहनों और निर्माण पर प्रतिबंध पुराना और विफल तरीका

दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वाहनों और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना प्रदूषण नियंत्रण का पुराना और विफल तरीका है। कोर्ट ने सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव के साथ दीर्घकालिक समाधान अपनाने की जरूरत बताई। सुनवाई के दौरान दिवाली पर बढ़ती वाहनों की आवाजाही, गिफ्ट कल्चर और पराली प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। वहीं दिल्ली के कई इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया।

Nov 6, 2026 - 15:27
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Delhi Pollution: प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI सूर्यकांत बोले- वाहनों और निर्माण पर प्रतिबंध पुराना और विफल तरीका

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में दिवाली और सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। जहरीली हवा और बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि वाहनों और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना प्रदूषण रोकने का पुराना और विफल तरीका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पाबंदियां लगाने से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है।

दिवाली के गिफ्ट कल्चर पर भी उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने दिवाली पर महंगे उपहारों के आदान-प्रदान की परंपरा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संपन्न वर्ग में दिवाली पर महंगे गिफ्ट देना सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बनता जा रहा है। त्योहारों के दौरान वाहनों की आवाजाही बढ़ने से भी प्रदूषण का स्तर प्रभावित होता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए केवल राजधानी में चलने वाले वाहन जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की भी इसमें भूमिका है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक स्तर पर योजना बनाने की जरूरत है।

'जितने ज्यादा आदेश, उतना ज्यादा उल्लंघन'

सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों और निर्माण गतिविधियों पर लगाए जाने वाले अस्थायी प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि जितने अधिक आदेश जारी किए जाएंगे, नियमों के उल्लंघन के मामले भी उतने ही बढ़ सकते हैं।

पीठ ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए पराली प्रबंधन पर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कोर्ट ने कहा कि किसानों को पराली के उचित प्रबंधन के लिए पहले से उचित खरीद मूल्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही पराली प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपने का सुझाव भी दिया गया, ताकि समस्या का समाधान स्थानीय स्तर पर किया जा सके।

दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति का मुद्दा उठाया।

उन्होंने बताया कि राजधानी की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है और इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने प्रदूषण से होने वाले नुकसान की गंभीरता समझाने के लिए इसकी तुलना रोजाना 30 सिगरेट पीने से होने वाले नुकसान से की।

AQI 475 के पार, कई इलाकों में हवा गंभीर

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार सुबह दिल्ली के 39 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। रोहिणी में AQI 475 और IIT दिल्ली में 472 रिकॉर्ड किया गया। वहीं सुबह 10 बजे एक निगरानी केंद्र पर PM2.5 का स्तर 335 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ।

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण ने एक बार फिर स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को बढ़ा दिया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल वाहनों और निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के बजाय ठोस नीतियों, बेहतर पराली प्रबंधन, जनभागीदारी और दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान देना होगा।

अब देखना होगा कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियां किस तरह प्रभावी कदम उठाती हैं।