ऋषि सुनक ने राष्ट्रीय पहचान को त्वचा के रंग से जोड़ने पर जताई चिंता, कहा- मैं अंग्रेज और हिंदू दोनों हूं

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपने लेख में राष्ट्रीय पहचान, नस्ल और आव्रजन को लेकर चल रही बहस पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की त्वचा का रंग उसकी ब्रिटिश या अंग्रेज पहचान तय करने का आधार नहीं होना चाहिए। सुनक ने अपनी पहचान का उल्लेख करते हुए खुद को अंग्रेज और हिंदू बताया तथा 1990 में सामने आए ‘टेबिट टेस्ट’ का संदर्भ देते हुए ‘रिवर्स टेबिट टेस्ट’ की चर्चा की।

Sep 22, 2026 - 16:52
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ऋषि सुनक ने राष्ट्रीय पहचान को त्वचा के रंग से जोड़ने पर जताई चिंता, कहा- मैं अंग्रेज और हिंदू दोनों हूं

UNITED NEWS OF ASIA. लंदन। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने राष्ट्रीय पहचान, नस्ल और आव्रजन को लेकर चल रही बहस पर अपनी चिंता जाहिर की है। द संडे टाइम्स में लिखे अपने नियमित कॉलम में सुनक ने कहा कि ब्रिटिश या अंग्रेज पहचान को किसी व्यक्ति की त्वचा के रंग या नस्ल से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने अपनी पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अंग्रेज और हिंदू दोनों हैं।

सुनक ने ब्रिटेन की बहु-जातीय और बहु-धार्मिक लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक उपलब्धि दबाव में है। उनके लेख में आव्रजन को नियंत्रित करने में सरकारों की भूमिका और समाज में एकीकरण से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया गया। सुनक ने कहा कि आव्रजन को कम करने और एकीकरण के लिए कड़े कदमों की वकालत करना अलग बात है, लेकिन ब्रिटिश पहचान को नस्ल या त्वचा के रंग से तय करना अलग मुद्दा है।

अपने लेख में सुनक ने ‘टेबिट टेस्ट’ का भी उल्लेख किया। यह अवधारणा तत्कालीन कंजरवेटिव सांसद नॉर्मन टेबिट ने 1990 में रखी थी। इसका संबंध इस सवाल से था कि प्रवासी इंग्लैंड की क्रिकेट टीम के बजाय अपने मूल देश की टीम का समर्थन करते हैं या नहीं। टेबिट के तर्क में क्रिकेट टीम के समर्थन को ब्रिटिश समाज में एकीकरण और जुड़ाव के संकेत के रूप में देखा गया था।

सुनक ने इसी संदर्भ में ‘रिवर्स टेबिट टेस्ट’ की बात कही। उनका तर्क था कि गैर-श्वेत लोगों से कभी-कभी उनकी ब्रिटिश या अंग्रेज पहचान को लेकर ऐसे सवाल किए जाते हैं, जिन्हें वे केवल अपनी त्वचा के रंग के कारण पूरी तरह पार नहीं कर सकते। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ब्रिटिशता को नस्ल या रंग के आधार पर परिभाषित किया गया तो समाज में लोगों के बीच अलग-अलग श्रेणियां बनने का खतरा रहेगा।

सुनक ने क्रिकेट और खेल को भी सामाजिक एकीकरण के माध्यम के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने पिछले सप्ताह लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के काउड्रे लेक्चर का संदर्भ देते हुए खेलों को अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ने वाली गतिविधि बताया। उनके अनुसार, साझा खेल अनुभव लोगों के बीच सामाजिक और राष्ट्रीय जुड़ाव को मजबूत करने में भूमिका निभा सकते हैं।

अपने लेख में सुनक ने आव्रजन और एकीकरण की नीतियों को लेकर अपनी चिंताएं भी रखीं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार में रहे लोगों को आव्रजन को पर्याप्त रूप से नियंत्रित न कर पाने से पैदा हुई चुनौतियों का सामना करना होगा। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आव्रजन पर बहस और राष्ट्रीय पहचान को नस्ल के आधार पर परिभाषित करना दो अलग मुद्दे हैं।

ऋषि सुनक ब्रिटेन के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री रहे हैं। उन्होंने जुलाई 2024 तक प्रधानमंत्री पद संभाला था। राष्ट्रीय पहचान को लेकर उनके हालिया लेख ने ब्रिटेन में नस्ल, आव्रजन, एकीकरण और ब्रिटिशता की परिभाषा पर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।