UGC Rules 2026: समता नियमों पर केंद्र सरकार का बदला रुख, सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा समिति का प्रस्ताव; BJP के सामने जातीय समीकरण साधने की चुनौती
UGC के 2026 के समता नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इन नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने पर विचार करने की जानकारी दी है। 5 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी वर्गों के छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इससे पहले 29 जनवरी 2026 को अदालत ने नए नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए 2012 के नियमों को जारी रखने का निर्देश दिया था। इस घटनाक्रम ने सामाजिक और राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के समता नियमों को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी दी है। सरकार ने नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने पर विचार करने की बात कही है। 5 नवंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र के इस रुख से मामले में नया मोड़ आ गया है। नियमों को लेकर अलग-अलग सामाजिक वर्गों की आपत्तियों और राजनीतिक बहस के बीच सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
UGC के नए नियमों पर क्यों हुआ विवाद?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने के उद्देश्य से नए नियम अधिसूचित किए थे। इनका नाम UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 है।
इन नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत करना है। नए प्रावधानों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को जातिगत भेदभाव से संबंधित प्रावधानों में शामिल किया गया।
हालांकि, सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों और लोगों ने नियमों की परिभाषा तथा शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने और सभी वर्गों के छात्रों को समान संरक्षण देने के लिए स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी नियमों पर रोक
UGC के नए नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। 29 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान अदालत ने नियमों के कुछ प्रावधानों की स्पष्टता और उनके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2026 के नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी और अगले आदेश तक UGC के 2012 के नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया।
केंद्र सरकार ने समीक्षा समिति पर क्या कहा?
5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से बताया कि सरकार नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए समिति गठित करने पर विचार कर रही है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे प्रत्येक छात्र के हितों की रक्षा हो और किसी भी वर्ग को असुरक्षा या भेदभाव का अनुभव न हो।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
BJP के सामने जातीय समीकरण की चुनौती
UGC नियमों को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के सामने एक ओर सामान्य वर्ग की आपत्तियों और दूसरी ओर OBC तथा दलित वर्गों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में सवर्ण, OBC और दलित समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े इस मुद्दे का राजनीतिक प्रभाव भी चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, इस विवाद का आगामी चुनावों पर क्या असर होगा, यह आने वाले समय में राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा।
RSS और विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस विवाद पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने नियमों को लेकर मिले जमीनी फीडबैक और उनमें संतुलन की आवश्यकता का उल्लेख किया था।
वहीं शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को विरोध के बाद अपने कदम पर पुनर्विचार करना पड़ा।
अब समीक्षा समिति के फैसले पर नजर
UGC के 2026 के समता नियमों को लेकर अब आगे की दिशा समीक्षा समिति के गठन, उसकी सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से तय होगी। सरकार के सामने एक तरफ उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने की व्यवस्था मजबूत करने और दूसरी तरफ सभी वर्गों के छात्रों के लिए समान एवं स्पष्ट संरक्षण सुनिश्चित करने की चुनौती है।