राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस: रोकथाम, टीकाकरण और समय पर जांच से घट सकता है कैंसर का खतरा, डॉ. भरत भूषण खुर्से ने दी महत्वपूर्ण सलाह
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर रायपुर के एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. भरत भूषण खुर्से ने कैंसर से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, एचपीवी और हेपेटाइटिस बी टीकाकरण तथा नियमित स्क्रीनिंग का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि कैंसर की शुरुआती पहचान से उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। परिवार के स्वास्थ्य इतिहास की जानकारी और समय पर चिकित्सकीय परामर्श भी महत्वपूर्ण है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l कैंसर आज गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल है, लेकिन जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली, टीकाकरण और समय पर जांच के माध्यम से कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के अवसर पर एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. भरत भूषण खुर्से ने कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
डॉ. खुर्से ने बताया कि उनके क्लिनिक में कई मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें बीमारी का पता काफी देर से चलता है। कुछ मामलों में लक्षण महीनों पहले दिखाई देने लगते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव या लापरवाही के कारण जांच नहीं कराई जाती। उन्होंने कहा कि कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान होने से उपचार के विकल्प बढ़ सकते हैं और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
स्वस्थ जीवनशैली से कम हो सकता है कैंसर का खतरा
डॉ. खुर्से के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधियां स्तन और कोलोरेक्टल सहित कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम कम करने में सहायक हो सकती हैं। प्रतिदिन तेज पैदल चलना, साइकिल चलाना और खेलकूद जैसी गतिविधियां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। इसके साथ संतुलित खानपान भी जरूरी है। अत्यधिक जला हुआ मांस बार-बार खाने से बचना चाहिए। भोजन पकाने के लिए भाप, बेकिंग और नियंत्रित तापमान पर ग्रिलिंग जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं।
टीकाकरण कैंसर से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम
उन्होंने बताया कि एचपीवी और हेपेटाइटिस बी के टीके कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एचपीवी टीका सर्वाइकल कैंसर सहित एचपीवी संक्रमण से जुड़े कुछ अन्य कैंसरों का जोखिम कम करता है। वहीं हेपेटाइटिस बी टीका संक्रमण से बचाव करके उससे संबंधित लिवर कैंसर का खतरा घटाने में मदद करता है। टीकाकरण की उचित उम्र और आवश्यकता के लिए चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
परिवार का स्वास्थ्य इतिहास जानना जरूरी
डॉ. खुर्से ने कहा कि जिन परिवारों में स्तन या अंडाशय के कैंसर का इतिहास रहा है, उनके सदस्यों को डॉक्टर को इसकी जानकारी देनी चाहिए। कुछ मामलों में BRCA जीन से जुड़े आनुवंशिक बदलाव कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। चिकित्सकीय सलाह के आधार पर जेनेटिक काउंसलिंग और आवश्यक जांच से जोखिम का आकलन किया जा सकता है।
समय पर स्क्रीनिंग से मिल सकते हैं बेहतर परिणाम
उन्होंने बताया कि बिना लक्षण वाले लोगों में भी स्क्रीनिंग से कुछ कैंसरों या कैंसर-पूर्व बदलावों का पता लगाया जा सकता है। स्तन कैंसर के लिए मैमोग्राफी, कोलोरेक्टल कैंसर के लिए मल आधारित जांच या कोलोनोस्कोपी और सर्वाइकल कैंसर के लिए एचपीवी या पैप टेस्ट महत्वपूर्ण विकल्प हैं। तंबाकू और गुटखा सेवन करने वालों को नियमित मुंह की जांच करानी चाहिए। प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग के लाभ और जोखिम पर भी चिकित्सक से चर्चा जरूरी है। जांच शुरू करने की उम्र व्यक्तिगत जोखिम और चिकित्सकीय दिशानिर्देशों पर निर्भर करती है।
जागरूकता और समय पर परामर्श जरूरी
डॉ. खुर्से ने नागरिकों से अपील की कि कैंसर के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करें। परिवार के स्वास्थ्य इतिहास की जानकारी रखें, आवश्यक टीकाकरण करवाएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराएं। उन्होंने कहा कि कैंसर की समय पर पहचान उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
विशेष सूचना: कैंसर की सभी किस्मों को रोका नहीं जा सकता और कोई भी स्क्रीनिंग जांच शत-प्रतिशत सटीक नहीं होती। जांच और टीकाकरण का निर्णय उम्र, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर चिकित्सकीय सलाह से लेना चाहिए।