दिल्ली SIR में 33 लाख नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 33.13 लाख मतदाताओं को ‘Logical Discrepancy’ और ‘No Mapping’ श्रेणियों में नोटिस दिए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने नोटिस जारी करने के आधार, तैनात कर्मचारियों और मतदाताओं की सहायता व्यवस्था से जुड़ी जानकारी मांगी।

Sep 22, 2026 - 18:58
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दिल्ली SIR में 33 लाख नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग से जवाब मांगा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और उन्हें नोटिस जारी करने के विशिष्ट कारण सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने ‘Logical Discrepancy’ की श्रेणी के आधार को स्पष्ट करने के लिए चुनाव आयोग से कहा। जस्टिस बागची ने बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने के संदर्भ में प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि ये नोटिस लगभग यांत्रिक तरीके से जारी किए गए प्रतीत होते हैं। वहीं चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने आयोग से पूछा कि ‘Logical Discrepancy’ से क्या आशय है और इसे स्पष्ट करने की जरूरत बताई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि करीब 33 लाख मतदाताओं को ‘Logical Discrepancy’ या ‘No Mapping’ जैसे आधारों पर नोटिस दिए गए हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ नोटिसों में मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र के बीच 15 साल से कम अंतर जैसी विसंगति का उल्लेख है, जबकि आयोग द्वारा बताए गए दस्तावेजों में माता-पिता की उम्र से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं होती।

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने अदालत को बताया कि इस प्रक्रिया के लिए करीब 14 हजार बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और 1,200 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नोटिस के जवाब और सत्यापन की प्रक्रिया के लिए 29 अक्टूबर की समयसीमा रखी गई है और जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया जा सकता है। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाया नहीं जाएगा।

अदालत ने यह भी पूछा कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए पर्याप्त जानकारी और सहायता किस तरह उपलब्ध कराई जा रही है। आयोग ने बताया कि नोटिस में दिए गए दस्तावेजों की सूची अंतिम नहीं है। इसके अलावा मतदाताओं की सहायता के लिए कैंप, जागरूकता कार्यक्रम और WhatsApp ग्रुप बनाए गए हैं। जस्टिस बागची ने BLO को वार्ड कार्यालयों में उपलब्ध कराने का सुझाव दिया, जिस पर आयोग ने बताया कि ऐसी व्यवस्था की जा रही है।

चीफ जस्टिस ने मतदाताओं का भरोसा बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रकार की आपत्तियों और सवालों के लिए मानक जवाब तथा स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। अदालत ने यह भी कहा कि मतदाताओं को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि नोटिस का जवाब देने के लिए कौन-सी जानकारी पर्याप्त होगी।

दिल्ली SIR के ड्राफ्ट मतदाता रिकॉर्ड के अनुसार 31 अगस्त को प्रकाशित सूची में 97,53,577 मतदाता शामिल थे। वहीं 47,56,722 नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों के तहत ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए। इसके अलावा 33,12,919 मतदाताओं को ‘No Mapping’ या ‘Logical Discrepancy’ के आधार पर नोटिस के लिए चिन्हित किया गया था। इनमें 13,79,785 मतदाता ‘No Mapping’ और 19,33,134 ‘Logical Discrepancy’ श्रेणी में बताए गए हैं।

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले में उठाए गए कदमों की जानकारी देने वाली पहली स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। अदालत ने SIR से जुड़े बिहार और पश्चिम बंगाल मामलों में दिए गए अंतरिम निर्देशों का पालन करने का भी निर्देश दिया। मामले में आगे की कार्यवाही चुनाव आयोग के जवाब और स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर होगी।