UPI पर 0.4% MDR के विरोध में सुरेश कपाले बोले- सरकार फैसला वापस ले
छिंदवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष और अधिवक्ता सुरेश कपाले ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4% MDR का विरोध किया है। उन्होंने इसे आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर असर डालने वाला फैसला बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। हालांकि, सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, बल्कि पात्र मर्चेंट लेनदेन पर MDR के रूप में लागू होगा।
UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष और अधिवक्ता सुरेश कपाले ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का विरोध किया है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए इसे आम जनता और छोटे व्यापारियों के हितों से जुड़ा मुद्दा बताया।
सुरेश कपाले ने कहा कि सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देकर लोगों को UPI के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया और अब बड़े मूल्य के कुछ UPI भुगतान पर MDR लागू करने का फैसला लिया है। उनके मुताबिक इससे छोटे व्यापारियों के कारोबार की लागत बढ़ सकती है। उन्होंने दावा किया कि यदि इसका भार किसी तरह ग्राहकों तक पहुंचता है तो डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की व्यवस्था से छोटे दुकानदारों और आम कारोबारियों की चिंता बढ़ सकती है। कपाले ने आशंका जताई कि अतिरिक्त लागत के कारण कुछ व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं। उन्होंने सरकार से UPI को लेकर शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की।
हालांकि, केंद्र सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार 0.4 प्रतिशत MDR सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। वहीं 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान और पात्र छोटे व्यापारियों के लेनदेन को जीरो-MDR व्यवस्था में रखा गया है। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहकों से सीधे वसूला जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। Person-to-Person (P2P) UPI लेनदेन किसी भी राशि के लिए निशुल्क रहेंगे। वित्त मंत्रालय के अनुसार MDR भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स के बीच वितरित होगा। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
सरकारी व्यवस्था के तहत 75,000 रुपये या उससे अधिक के पात्र मर्चेंट लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। वहीं रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
UPI शुल्क को लेकर व्यापारिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सुरेश कपाले ने अपने बयान के माध्यम से इस व्यवस्था का विरोध करते हुए सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि नई MDR व्यवस्था UPI के संचालन, तकनीकी ढांचे और दीर्घकालिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए सीमित दायरे में लागू की जा रही है।