एल्युमिनियम बना ऊर्जा क्षेत्र की मजबूत कड़ी, लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने में अहम भूमिका

भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग और रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के बीच एल्युमिनियम बिजली ट्रांसमिशन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य ऊर्जा बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हल्का वजन, विद्युत चालकता, जंग से बचाव और पुनर्चक्रण क्षमता इसे ऊर्जा क्षेत्र के लिए उपयोगी धातु बनाती है। बालको भी वायर रॉड्स समेत विभिन्न एल्युमिनियम उत्पादों के जरिए ऊर्जा और बिजली नेटवर्क को सहयोग दे रहा है।

Sep 22, 2026 - 19:27
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एल्युमिनियम बना ऊर्जा क्षेत्र की मजबूत कड़ी, लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने में अहम भूमिका

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ते देश के लिए मजबूत ऊर्जा बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण है। बिजली उत्पादन के साथ उसे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। इस व्यवस्था में एल्युमिनियम अपनी विशेषताओं के कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

देश में पारंपरिक बिजली उत्पादन के साथ सौर और पवन ऊर्जा जैसी रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है। इसके अलावा डेटा सेंटर, डिजिटल सुविधाओं, उद्योगों और व्यवसायों के बढ़ते विस्तार के कारण भरोसेमंद बिजली की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में बिजली उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

एल्युमिनियम का हल्का वजन, अच्छी विद्युत चालकता, जंग से बचाव और पुनर्चक्रण की क्षमता इसे ऊर्जा क्षेत्र के लिए उपयोगी बनाती है। सौर पैनलों के फ्रेम, विभिन्न संरचनाओं, बिजली ग्रिड और पवन ऊर्जा से जुड़े उपकरणों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर ओवरहेड बिजली लाइनों में एल्युमिनियम आधारित कंडक्टर का व्यापक उपयोग होता है।

तांबा भी बिजली का अच्छा चालक है, लेकिन एल्युमिनियम का वजन काफी कम होता है। समान आयतन के आधार पर एल्युमिनियम की विद्युत चालकता तांबे की लगभग 61 प्रतिशत बताई जाती है। इसके बावजूद कम वजन और अपेक्षाकृत कम लागत के कारण लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने वाली लाइनों में एल्युमिनियम उपयोगी विकल्प बनता है।

हल्के कंडक्टर बिजली के टावरों पर पड़ने वाले भार को कम करने में मदद करते हैं। इससे ट्रांसमिशन नेटवर्क की स्थापना और विस्तार में भी सुविधा होती है। शहरों के साथ-साथ दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने में ऐसे नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है।

भारत के ऊर्जा ढांचे में एल्युमिनियम का उपयोग केवल बिजली ट्रांसमिशन तक सीमित नहीं है। एलएनजी सुविधाओं, समुद्री तेल एवं गैस प्लेटफॉर्म, भंडारण प्रणालियों और पाइपलाइन से जुड़े ढांचे के अलावा रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं में भी इसकी उपयोगिता है। एल्युमिनियम की पुनर्चक्रण क्षमता इसे संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाती है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार औद्योगीकरण, शहरीकरण और बढ़ते विद्युतीकरण के कारण भारत की ऊर्जा मांग 2027 तक हर साल 6.3 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। भारत ने अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। देश का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ना है।

इन लक्ष्यों के लिए रिन्यूएबल एनर्जी, बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी। ऐसे में एल्युमिनियम की मांग और उपयोगिता ऊर्जा क्षेत्र में और बढ़ सकती है।

भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) भी विभिन्न एल्युमिनियम उत्पादों के माध्यम से इस क्षेत्र में योगदान दे रही है। कंपनी बिलेट्स, वायर रॉड्स, इनगॉट्स और रोल्ड उत्पादों का उत्पादन करती है, जिनका इस्तेमाल बिजली ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क, विद्युत बुनियादी ढांचे और रिन्यूएबल एनर्जी प्रणालियों में किया जाता है।

घरेलू एल्युमिनियम वायर रॉड्स क्षेत्र में लगभग 33 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ बालको की महत्वपूर्ण उपस्थिति बताई गई है। कंपनी की वर्तमान वार्षिक उत्पादन क्षमता 5.75 लाख टन है और इसे बढ़ाकर 10 लाख टन करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सौर और पवन ऊर्जा से लेकर बिजली को लंबी दूरी तक पहुंचाने वाले नेटवर्क तक, एल्युमिनियम भारत के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।