पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने जानकारी देते हुए बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों में एसीएम राधिका कुंजाम, एसीएम संदीप कड़ियाम और पीएम रैनू पद्दा शामिल हैं। इन तीनों ने पुनर्वास योजना के तहत आगे आकर हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया। उनके पास से कुल तीन हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें दो एसएलआर और एक .303 राइफल शामिल है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन माओवादी कैडरों से पूछताछ के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं, जिनके आधार पर क्षेत्र में सक्रिय अन्य माओवादी सदस्यों से संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस और सुरक्षा बल लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि अधिक से अधिक माओवादी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पट्टलिंगम ने इन आत्मसमर्पणों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने शेष माओवादी कैडरों से भी अपील की कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार द्वारा संचालित पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि माओवादियों के पास आत्मसमर्पण कर सम्मानजनक जीवन जीने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर है और उन्हें इसका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। पुलिस और प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों का पुनर्वास पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए।
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा माओवादी आत्मसमर्पण करने वालों के लिए विभिन्न पुनर्वास योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके तहत उन्हें आर्थिक सहायता, रोजगार के अवसर और समाज में पुनः स्थापित होने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है।
लगातार हो रहे आत्मसमर्पण यह संकेत दे रहे हैं कि माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है और उनके सदस्य अब हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास की ओर बढ़ना चाहते हैं। यह न केवल सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता है, बल्कि क्षेत्र में बदलते माहौल और लोगों के विश्वास का भी प्रमाण है।
कुल मिलाकर, कांकेर जिले में हाल के दिनों में हुए इन आत्मसमर्पणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।