खैरागढ़ में कोसरिया यादव समाज में नेतृत्व की जंग, दो गुटों के दावों से बढ़ा विवाद
खैरागढ़ में कोसरिया यादव समाज के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद तेज हो गया है। दो गुटों ने अपने-अपने अध्यक्ष पद के दावे पेश किए हैं, जिससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति बन गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. मनोहर सेन, खैरागढ़ । खैरागढ़ जिले में कोसरिया यादव समाज के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है और यह मुद्दा लगातार गहराता जा रहा है। समाज के दो प्रमुख गुट ईश्वर यादव और चंद्रशेखर यादव अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं, जिससे पूरे समाज में असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है।
शनिवार को बांके बिहारी मंदिर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान ईश्वर यादव गुट ने दूसरे पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदेश संगठन मंत्री सूर्यकांत यादव और जिला अध्यक्ष ईश्वर यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्ष 2023 में 24 सर्किलों की सहमति से उनका मनोनयन वैध पंजीयन (क्रमांक 4473) के तहत किया गया था, जो पूरी तरह से विधिसम्मत और मान्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरा गुट समाज को विभाजित करने का प्रयास कर रहा है, जिससे सामाजिक एकता को नुकसान पहुंच रहा है।
ईश्वर यादव गुट ने विशेष रूप से चंद्रशेखर यादव द्वारा प्रस्तावित 29 मार्च के कार्यक्रम और भूमि पूजन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि जिस भूमि पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, ताकि समाज के सामने सच्चाई स्पष्ट हो सके। उनका कहना है कि पारदर्शिता और वैधानिकता बनाए रखना समाज के हित में आवश्यक है।
वहीं दूसरी ओर, चंद्रशेखर यादव गुट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने चयन को पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का परिणाम बताया है। उनका दावा है कि 27 दिसंबर 2024 को 19 सर्किल अध्यक्षों की उपस्थिति में विधिवत चुनाव प्रक्रिया के तहत उन्हें अध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के अधिकांश सदस्य उनके साथ हैं और वे समाज के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं।
चंद्रशेखर यादव गुट 29 मार्च को बर्फानी धाम में महाधिवेशन और भवन निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में है। इस कार्यक्रम में बड़े नेताओं और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है, जिससे यह आयोजन और अधिक चर्चाओं में आ गया है।
एक ही समाज में दो अलग-अलग अध्यक्षों के दावे और समानांतर गतिविधियों ने कोसरिया यादव समाज के भीतर भ्रम और विभाजन की स्थिति पैदा कर दी है। समाज के सामान्य सदस्यों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि वास्तविक नेतृत्व किसके हाथ में है और किसे मान्यता दी जानी चाहिए।
स्थिति को देखते हुए समाज के वरिष्ठ और जिम्मेदार लोगों से अपेक्षा की जा रही है कि वे आगे आकर इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालें, ताकि समाज की एकता और अखंडता बनी रहे। फिलहाल, यह विवाद न केवल सामाजिक स्तर पर बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।