कोरबा भाजपा की नई कोर कमेटी पर उठे सवाल, कई वरिष्ठ और जमीनी नेता बाहर

कोरबा भाजपा की नई कोर कमेटी को लेकर संगठन के भीतर चर्चा तेज हो गई है। कई वरिष्ठ और जमीनी नेताओं को नई टीम में जगह नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। रामपुर और पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र के नेताओं की उपेक्षा भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

May 13, 2026 - 15:26
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कोरबा भाजपा की नई कोर कमेटी पर उठे सवाल, कई वरिष्ठ और जमीनी नेता बाहर

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में भारतीय जनता पार्टी की नई कोर कमेटी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर गठित नई कोर कमेटी में कई वरिष्ठ और जमीनी नेताओं को शामिल नहीं किए जाने से पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। संगठन के फैसले को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच लगातार चर्चा हो रही है।

कोरबा जिला भाजपा की कोर कमेटी की पहली बैठक मंगलवार 12 मई 2026 को जिला कार्यालय पंडित दीनदयाल कुंज, टीपी नगर में आयोजित की गई। बैठक में जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी, जिला संगठन प्रभारी अनिल केशरवानी, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, प्रदेश मंत्री रितु चौरसिया, महापौर संजू देवी राजपूत, रायपुर संभाग सह प्रभारी डॉ. राजीव सिंह, पूर्व अध्यक्ष मनोज शर्मा और ज्योतिनंद दुबे सहित कई नेता मौजूद रहे। बैठक में आगामी नगरीय निकाय उपचुनाव और त्रिस्तरीय पंचायत उपचुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई।

हालांकि बैठक के बाद सबसे ज्यादा चर्चा नई कोर कमेटी में वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर शुरू हो गई। पार्टी के कई पुराने और सक्रिय नेताओं को इस समिति में जगह नहीं दी गई है। वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकी राम कंवर का नाम भी इस सूची में शामिल नहीं होने से कार्यकर्ताओं में हैरानी देखी जा रही है। माना जा रहा था कि बदलते राजनीतिक हालातों में उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

इसके अलावा संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने वाले जोगेश लाम्बा, अशोक चावलानी, विकास महतो, रामदयाल उइके और पवन गर्ग जैसे नेताओं को भी कोर कमेटी से बाहर रखा गया है। इसे लेकर भाजपा के अंदरूनी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर अनुभवी नेताओं की उपेक्षा क्यों की जा रही है।

सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि रामपुर और पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र से किसी प्रमुख नेता को कोर कमेटी में शामिल नहीं किया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को आगामी चुनावों में मजबूत तैयारी की जरूरत है। ऐसे में इन क्षेत्रों के प्रभावशाली नेताओं की अनदेखी संगठनात्मक दृष्टि से बड़ा मुद्दा बन सकती है।

परिसीमन को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में कोरबा जिले में दो नए विधानसभा क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। ऐसे में संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी को और सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

भाजपा संगठन के भीतर फिलहाल ऊपरी तौर पर शांति दिखाई दे रही है, लेकिन अंदरखाने असंतोष की स्थिति बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी समय-समय पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आती रही है। कुछ नेताओं को महत्व देने और कई पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को लेकर संगठन के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं।

इस मामले में जब उपेक्षित नेताओं से चर्चा की गई तो उन्होंने नई कोर कमेटी के गठन और बैठक में शामिल नहीं किए जाने की जानकारी से अनभिज्ञता जताई। वहीं जिला भाजपा संगठन की ओर से इस पूरे मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।