सीजेपी विरोध प्रदर्शन में असम के मंत्री की बेटी की मौजूदगी पर सियासत, मुख्यमंत्री हिमंता बोले- मिलने पर समझाऊंगा

नीट पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए सीजेपी प्रदर्शन में असम के मंत्री केशव महंता की बेटी के शामिल होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाने के वायरल वीडियो के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को उसके वयस्क बच्चों के विचारों के आधार पर ट्रोल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अगली मुलाकात में इस मुद्दे पर उनसे बात करेंगे।

Jul 26, 2026 - 16:34
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सीजेपी विरोध प्रदर्शन में असम के मंत्री की बेटी की मौजूदगी पर सियासत, मुख्यमंत्री हिमंता बोले- मिलने पर समझाऊंगा

UNITED NEWS OF ASIA. नीट पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के विरोध में आयोजित सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान असम की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया, जब असम सरकार के मंत्री केशव महंता की बेटी दिबिसा महंता के प्रदर्शन में शामिल होने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इन वीडियो में उन्हें कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाते और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए दिखाया गया। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

यह प्रदर्शन परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरोध में आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। इसी दौरान दिबिसा महंता की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और मंत्री केशव महंता को भी लेकर टिप्पणियां की जाने लगीं।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट कहा कि किसी भी मंत्री या जनप्रतिनिधि को उसके वयस्क बच्चों के विचारों और गतिविधियों के आधार पर निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संभव है किसी परिवार के सदस्य की राजनीतिक सोच अपने माता-पिता से अलग हो और लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी स्वतंत्र राय रखने का अधिकार है।

मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भविष्य में उनका बेटा वकालत के पेशे में जाता है तो संभव है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष रखे, जिसकी विचारधारा या कार्यों से वे स्वयं सहमत न हों। इसलिए किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत राय को उसके माता-पिता की राजनीतिक जिम्मेदारी से जोड़ना सही नहीं माना जा सकता।

हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी कहा कि वह वायरल वीडियो में लगाए गए नारों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जब भी उनकी मुलाकात दिबिसा महंता से होगी, तब वह इस विषय पर उनसे बातचीत करेंगे और अपनी बात समझाने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान को राजनीतिक मर्यादा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, इस मामले में मंत्री केशव महंता की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। हालांकि, वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने के कारण इस मामले को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों की राजनीतिक सोच अलग होना असामान्य नहीं है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयान के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नजरिए से भी देख रही है। वहीं, वीडियो की प्रमाणिकता और उससे जुड़े तथ्यों पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।