सम्मेलन के दौरान आयोजित रूरल हाट विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहां छिंदवाड़ा सहित विभिन्न जिलों से आए किसानों और उद्यमियों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी में रखे गए स्थानीय एवं पारंपरिक उत्पादों ने विदेशी प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया और उन्होंने इनकी खूब सराहना की।
ब्लूबेरी, बॉम्बे ग्रीन आम, चिरौंजी एवं नवरत्न आटा जैसे उत्पादों ने प्रदर्शनी में विशेष पहचान बनाई। इन उत्पादों की गुणवत्ता, प्राकृतिक उत्पादन पद्धति और स्थानीय स्वाद को देखकर विदेशी मेहमान काफी प्रभावित हुए। कई प्रतिनिधियों ने किसानों से सीधे संवाद कर उत्पादों की जानकारी भी प्राप्त की।
विदेशी प्रतिनिधियों ने भारतीय किसानों की मेहनत, नवाचार और आत्मनिर्भरता की भावना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत के ग्रामीण क्षेत्र तेजी से कृषि नवाचार और जैविक उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जो वैश्विक कृषि व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है।
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत की पारंपरिक कृषि पद्धतियां अब आधुनिक तकनीक के साथ मिलकर एक मजबूत और टिकाऊ मॉडल के रूप में उभर रही हैं। ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को भी इस मंच पर विशेष महत्व मिला, जिसके तहत स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
छिंदवाड़ा और अन्य जिलों के किसानों द्वारा प्रदर्शित उत्पादों ने यह साबित किया कि ग्रामीण भारत अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहा है।
सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों ने भारत की कृषि परंपरा और आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे प्रयासों को सराहा और इसे भविष्य की वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने किसानों के कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह आयोजन न केवल कृषि सहयोग को बढ़ावा देने वाला साबित हुआ, बल्कि इससे भारत की कृषि नीति और ग्रामीण उद्यमिता को वैश्विक मंच पर नई पहचान भी मिली।