महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महिला कोष की योजनाएं अहम : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिला कोष की योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मंत्रालय में आयोजित बैठक में योजनाओं के विस्तार, ऋण वितरण और महिला स्व-सहायता समूहों को अधिक लाभ पहुंचाने पर चर्चा की गई।

Mar 11, 2026 - 12:48
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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महिला कोष की योजनाएं अहम : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

UNITED NEWD OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री Lakshmi Rajwade ने कहा है कि राज्य में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और महिला कोष की योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि वे इनका लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकें।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े Atal Nagar Naya Raipur स्थित मंत्रालय में आयोजित Chhattisgarh Mahila Kosh के शासी बोर्ड और आमसभा की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। इस बैठक में महिला कोष की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान महिला स्व-सहायता समूहों और पात्र महिलाओं को दिए गए ऋण की जानकारी प्रस्तुत की गई। बताया गया कि ऋण योजना के तहत 1500 महिला स्व-सहायता समूहों को लगभग 30 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वहीं सक्षम योजना के अंतर्गत 1000 पात्र महिलाओं को लगभग 14 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

बैठक के दौरान सक्षम योजना, ऋण योजना और स्वावलंबन योजना के लक्ष्यों और उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में महिला स्व-सहायता समूहों को द्वितीय बार अधिकतम 6 लाख रुपये तक का ऋण देने का प्रावधान है, जबकि सक्षम योजना के अंतर्गत महिलाओं को अधिकतम 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

बैठक में इन प्रावधानों में आवश्यकता अनुसार संशोधन किए जाने की संभावना पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को योजनाओं का लाभ मिल सके। साथ ही सितंबर 2025 की स्थिति में जिलों में जमा ब्याज राशि लगभग 8 लाख 2 हजार 843 रुपये होने की जानकारी दी गई, जिसके उपयोग से महिला कोष के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित करने पर भी चर्चा हुई।

महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक Shammi Abidi ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत महिलाओं को मात्र 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।

बैठक में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी पात्रता के आधार पर सक्षम योजना का लाभ देने तथा योजना में महिलाओं की आयु सीमा 25 से 50 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। इस पहल से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद जताई गई।

बैठक में महिला एवं बाल विकास, वाणिज्य एवं उद्योग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, समाज कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामोद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन, वन तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही Nehru Yuva Kendra, NABARD, State Bank of India और UNICEF के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

बैठक में यह भी कहा गया कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।