बलरामपुर कांग्रेस में बढ़ा विवाद, इस्तीफों की झड़ी के बीच संगठन में गहराई गुटबाजी

बलरामपुर जिला कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। जिला महामंत्री सहित कई पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद संगठन में गुटबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इसका असर जमीनी स्तर पर पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

Mar 11, 2026 - 12:31
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बलरामपुर कांग्रेस में बढ़ा विवाद, इस्तीफों की झड़ी के बीच संगठन में गहराई गुटबाजी

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर | छत्तीसगढ़ के Balrampur जिले में इन दिनों Indian National Congress के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। जिला कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद संगठन के भीतर बढ़ते विवाद अब इस्तीफों तक पहुंच गए हैं, जिससे पार्टी के अंदर गुटबाजी की स्थिति स्पष्ट दिखाई देने लगी है।

जानकारी के अनुसार जिला कांग्रेस के महामंत्री Sanjeev Gupta ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ही तीन जिला सचिव और छह मंडल अध्यक्षों ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं। इन इस्तीफों से यह संकेत मिल रहा है कि जिले में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा फिलहाल असंतोष और आंतरिक खींचतान से जूझ रहा है।

बताया जा रहा है कि नए जिलाध्यक्ष Harihar Yadav की कार्यकारिणी के गठन के बाद से ही पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई नेताओं का आरोप है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले अनुभवी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर नए लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी कारण संगठन के भीतर असंतोष गहराता गया और इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक Brihaspat Singh के करीबी माने जाने वाले संजीव गुप्ता ने नई सूची में अपनी भूमिका कमजोर होने पर नाराजगी जताते हुए पद छोड़ने का फैसला किया। उनके साथ Jaseem Ansari सहित कई अन्य पदाधिकारियों ने भी संगठन से दूरी बना ली है।

इधर जिलाध्यक्ष हरिहर यादव ने संजीव गुप्ता पर पार्टी गतिविधियों में निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक पत्र जारी कर कई कार्यक्रमों में उनकी अनुपस्थिति का हवाला दिया है। इस पत्राचार के बाद संगठन के भीतर विवाद और गहरा गया है और दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतृत्व की कमजोर पकड़ और संगठनात्मक तालमेल की कमी के कारण बलरामपुर कांग्रेस में यह स्थिति पैदा हुई है। यदि समय रहते नेतृत्व ने असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की कोशिश नहीं की, तो इसका सीधा असर पार्टी के जमीनी संगठन और आगामी चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।

वहीं दूसरी ओर जिले में पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह के समर्थकों का कहना है कि वे हमेशा क्षेत्र की जनता के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनके समर्थन की बात भी सामने आ रही है और कई लोग उन्हें एक मजबूत नेतृत्व के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल बलरामपुर कांग्रेस में जारी यह विवाद पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इस आंतरिक असंतोष को किस तरह संभालता है और संगठन को एकजुट रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।