प्रेसवार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला, यूथ विंग अध्यक्ष इमरान खान, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और हिंसा से प्रभावित परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।
प्रियंका शुक्ला ने कहा कि पार्टी द्वारा गठित जांच दल ने पीड़ित मुस्लिम परिवारों से प्रत्यक्ष संवाद कर जानकारी जुटाई है। पार्टी के अनुसार, 1 फरवरी 2026 को दुत्काईया गांव में 13 परिवारों के घरों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटना हुई, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के 28 दिन बीत जाने के बाद भी प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से न तो मुआवजा मिला है और न ही रहने-खाने की समुचित व्यवस्था की गई है।
प्रेसवार्ता में पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि पीड़ितों के अनुसार घटना से पहले गांव में लगातार तनावपूर्ण माहौल बनाया जा रहा था। पार्टी ने आरोप लगाया कि हिंसा के दौरान महिलाओं और बच्चों को भी डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह सभी तथ्य पीड़ित परिवारों के बयानों पर आधारित हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इमरान खान ने कहा कि जब पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचा, तब जाकर पूरे घटनाक्रम की गंभीरता सामने आई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई घायल लोगों को इलाज के लिए निजी प्रयासों से अस्पताल पहुंचाया गया और प्रशासन की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।
अनुषा जोसेफ ने कहा कि पार्टी ने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन अब तक पीड़ितों को किसी ठोस राहत की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों की बुनियादी जरूरतें भी फिलहाल सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से पूरी की जा रही हैं।
आम आदमी पार्टी ने इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार पर संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रियंका शुक्ला ने कहा कि यह केवल कुछ परिवारों पर हमला नहीं है, बल्कि प्रदेश में सामाजिक सौहार्द और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पार्टी ने राज्य सरकार से मांग की कि इस मामले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा तत्काल हस्तक्षेप करें और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
आम आदमी पार्टी की प्रमुख मांगें इस प्रकार रखी गईं—
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सभी प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल सुरक्षित आवास, भोजन एवं आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाए।
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प्रत्येक परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और जले हुए घरों की मरम्मत कराई जाए।
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हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाए।
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सभी पीड़ितों और गवाहों के बयान दोबारा विधिवत दर्ज किए जाएं।
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घटना में घायल लोगों, जिनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, के इलाज का पूरा खर्च शासन वहन करे।
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पीड़ित परिवारों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए और जब तक वे सुरक्षित रूप से अपने घर वापस नहीं लौट पाते, तब तक वैकल्पिक सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए।
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पार्टी नेताओं ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ही पीड़ित परिवारों को न्याय दिला सकती है और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने में सहायक होगी।
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