अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला
अमेरिका द्वारा बंदर अब्बास के पास ड्रोन लॉन्चर ठिकाने पर कार्रवाई के कुछ घंटों बाद ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाकर जवाबी हमला किया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अल सलेम एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले की पुष्टि की है। बढ़ते तनाव के बीच कुवैत ने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
UNITED NEWS OF ASIA. मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई किए जाने के कुछ घंटों बाद ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर जवाबी हमला कर दिया। ईरान की इस कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत के अल सलेम एयरबेस को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। यह एयरबेस अमेरिकी सेना के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक माना जाता है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका की ओर से बंदर अब्बास के पास की गई कार्रवाई के जवाब में किया गया है।
तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के बंदर अब्बास के पास एक ड्रोन लॉन्चर ठिकाने पर हमला किया था। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी बलों ने वहां मौजूद कई ड्रोन को नष्ट किया और एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भी निशाना बनाया। अमेरिका ने इस कार्रवाई को रक्षात्मक कदम बताया है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य के पास से गुजर रहे एक अमेरिकी व्यापारिक जहाज की सुरक्षा के दौरान ईरानी ड्रोन गतिविधियां देखी गई थीं। इसके बाद अमेरिकी सेना ने चार ड्रोन मार गिराए और संभावित हमले को रोकने के लिए संबंधित लॉन्चर को भी ध्वस्त कर दिया।
ईरान के जवाबी हमले के बाद कुवैत सरकार ने अपने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कुवैत सेना ने बताया कि एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं और संभावित खतरों पर लगातार नजर रखी जा रही है। क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ा दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को और गहरा कर दिया है। दोनों देशों के बीच अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा हुई थी और समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। हालांकि संवर्धित यूरेनियम को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं। अमेरिकी नेतृत्व ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख अपनाए हुए है, जबकि ईरान अपने अधिकारों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।
इधर क्षेत्रीय तनाव के बीच इजराइल ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार इजराइली सेना ने सीमा क्षेत्रों में कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे पूरे मध्य पूर्व में संघर्ष और व्यापक होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।