बालोद में गर्मी का कहर, पेड़ों से गिरकर मर रहे सैकड़ों चमगादड़
बालोद जिले के दल्लीराजहरा क्षेत्र में भीषण गर्मी और लू के कारण बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत हो रही है। 44 से 45 डिग्री तापमान के बीच रोजाना 250 से 300 चमगादड़ पेड़ों से गिरकर मर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए BSP प्रबंधन ने पेड़ों पर पानी का छिड़काव शुरू कराया है, जबकि नगर पालिका लगातार सैनिटाइजेशन और सफाई अभियान चला रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले में पड़ रही भीषण गर्मी अब केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो रही है। दल्लीराजहरा के बीएसपी एमव्हीटी सेंटर क्षेत्र में हजारों चमगादड़ भीषण गर्मी और लू की चपेट में आकर पेड़ों से गिर रहे हैं और उनकी मौत हो रही है। लगातार बढ़ते तापमान ने इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
दल्लीराजहरा क्षेत्र में तापमान लगातार 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण वर्षों पुराने नीलगिरी और बरगद के पेड़ों पर बसेरा करने वाले चमगादड़ गर्मी सहन नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से रोजाना सैकड़ों चमगादड़ पेड़ों के नीचे मृत अवस्था में मिल रहे हैं।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि प्रतिदिन लगभग 250 से 300 चमगादड़ों की मौत होने की बात सामने आ रही है। पेड़ों के नीचे बड़ी संख्या में मृत चमगादड़ पड़े रहने से इलाके में दुर्गंध फैलने लगी है। इसके चलते संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों में इस स्थिति को लेकर चिंता देखी जा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका दल्लीराजहरा की टीम लगातार सफाई अभियान चला रही है। नगर पालिका द्वारा मृत चमगादड़ों को हटाने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में ब्लीचिंग पाउडर और अन्य कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। नगर पालिका उपाध्यक्ष मनोज पिंटू दुबे ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मृत चमगादड़ों को हटाकर इलाके को सैनिटाइज किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार का संक्रमण न फैले।
इधर बीएसपी प्रबंधन ने भी हालात को देखते हुए राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। फायर ब्रिगेड वाहनों की मदद से पेड़ों पर लगातार पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य पेड़ों का तापमान कम करना और वहां बसेरा करने वाले चमगादड़ों को राहत पहुंचाना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी के छिड़काव से कुछ हद तक राहत मिलती दिखाई दे रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना केवल गर्मी का असर नहीं, बल्कि बिगड़ते पर्यावरण संतुलन का भी गंभीर संकेत है। लगातार बढ़ती गर्मी, पेड़ों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण वन्यजीवों का जीवन प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी के इस दौर में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जीवों की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्य जारी है।