मनेन्द्रगढ़ उपजेल में ‘खौफ’ का राज: प्रहरी संतोष तिवारी पर कैदियों से शोषण और अवैध वसूली के गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ उपजेल में पदस्थ प्रहरी संतोष तिवारी पर कैदियों से अमानवीय व्यवहार, अवैध वसूली और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्च स्तरीय जांच और तत्काल स्थानांतरण की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA . प्रदीप पाटकर , कोरिया | नेन्द्रगढ़ स्थित उपजेल इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि उपजेल में पदस्थ प्रहरी संतोष तिवारी पर कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना तथा अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह सभी आरोप परिजनों एवं स्थानीय सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं।
मामला छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला से जुड़ा हुआ है, जहां उपजेल को सुधार गृह के बजाय कथित तौर पर भय और दबाव के केंद्र के रूप में बताया जा रहा है।
लंबे कार्यकाल पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार प्रहरी संतोष तिवारी पिछले कई वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। आम तौर पर संवेदनशील पदों पर समय-समय पर तबादले किए जाते हैं, लेकिन लंबे समय से मनेन्द्रगढ़ उपजेल में बने रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि इसी लंबे कार्यकाल के चलते जेल परिसर में उनका दबदबा बढ़ गया और वे कथित रूप से “समानांतर व्यवस्था” चलाने लगे।
कैदियों से कथित अमानवीय व्यवहार
पीड़ित कैदियों के परिजनों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार—
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कैदियों के साथ गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा का नियमित प्रयोग किया जाता है।
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छोटी-छोटी बातों पर शारीरिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाए गए हैं।
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कैदियों को डराकर मानसिक दबाव में रखने की भी शिकायतें सामने आई हैं।
अवैध वसूली और संपत्ति के आरोप
सबसे गंभीर आरोप अवैध वसूली से जुड़ा है। आरोप है कि मुलाकात, सुविधाएं और जेल से जुड़ी अन्य बातों के नाम पर कैदियों के परिजनों से कथित रूप से भारी रकम वसूली गई। इन्हीं कथित अवैध गतिविधियों से करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति और आलीशान मकान खड़े किए जाने की चर्चा है।
हालांकि इन सभी आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
न्याय व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जेल में तैनात कर्मचारी ही कानून और मानवीय मूल्यों का उल्लंघन करने लगें, तो आम लोगों का न्याय प्रणाली से भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि जेल सुधार का स्थान है, न कि कथित प्रताड़ना का केंद्र।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
कैदियों के डरे-सहमे परिजनों और सामाजिक संगठनों ने छत्तीसगढ़ जेल विभाग तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि—
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प्रहरी संतोष तिवारी का तत्काल स्थानांतरण किया जाए।
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उनके कार्यकाल के दौरान सामने आई कथित प्रताड़ना की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्तियों की विस्तृत जांच की जाए।
परिजनों का कहना है कि निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है और इससे उपजेल में भरोसे का माहौल बहाल हो सकेगा।