आरोप है कि मनेंद्रगढ़ नगर पालिका में निर्वाचित अध्यक्ष प्रतिमा यादव की जगह उनके पति सरजू यादव ही वास्तविक रूप से प्रशासनिक और विकास संबंधी कार्यों में दखल दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि फाइलों की आवाजाही से लेकर अधिकारियों से संवाद और विकास कार्यों की निगरानी तक, लगभग हर स्तर पर अध्यक्ष पति की सक्रियता साफ देखी जा सकती है।
अवर सचिव के आदेश को ठेंगा
राज्य शासन द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि महिला जनप्रतिनिधियों के कार्यों में उनके पति अथवा रिश्तेदारों का हस्तक्षेप असंवैधानिक है और यह समानता तथा महिला अधिकारों की भावना के खिलाफ है। बावजूद इसके मनेंद्रगढ़ में स्थिति यह है कि कागजों में अध्यक्ष महिला हैं, लेकिन व्यवहारिक रूप से कुर्सी पर पति के प्रभाव की चर्चा आम हो चुकी है।
CMO की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी इशाक खान की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है। शासन के निर्देशों को लागू कराने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर CMO पर होती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई या हस्तक्षेप दिखाई नहीं दे रहा है।
जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या मुख्य नगर पालिका अधिकारी अपने ही उच्चाधिकारियों के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे, या फिर राजनीतिक और पारिवारिक प्रभाव के दबाव में मौन साधे हुए हैं।
महिला सशक्तीकरण का बन रहा मजाक
एक ओर सरकार महिला प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने, निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने और नेतृत्व विकसित करने के लिए नीतियां बना रही है, वहीं दूसरी ओर मनेंद्रगढ़ नगर पालिका में ‘पति-अध्यक्ष’ और ‘पति-पार्षद’ जैसी संस्कृति उन प्रयासों पर पानी फेरती नजर आ रही है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि यदि महिला प्रतिनिधियों को केवल नाममात्र का पद देकर वास्तविक सत्ता उनके पतियों या परिजनों के हाथ में सौंप दी जाएगी, तो यह न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है, बल्कि महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का भी हनन है।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या नगरीय प्रशासन विभाग अपने ही आदेशों की अवहेलना करने वाले मनेंद्रगढ़ नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और इस कथित अवैध हस्तक्षेप पर कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह कागजों में ही दबकर रह जाएगा।
जनता की निगाहें शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।