रतलाम मंडल ने रचा इतिहास: पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का सफल परिचालन

पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने 8 जनवरी 2026 को पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का सफल संचालन कर इतिहास रच दिया। यह ट्रेन बिलडी स्टेशन से जेएनपीटी (JNPT) के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से चलाई गई, जिससे समय, संसाधन और क्रू की बड़ी बचत हुई।

Jan 10, 2026 - 09:51
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रतलाम मंडल ने रचा इतिहास: पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का सफल परिचालन

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। यात्री ट्रेनों के सुरक्षित एवं समयबद्ध संचालन के साथ-साथ अब मालगाड़ी परिचालन में भी मंडल ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 08 जनवरी 2026 को पहली बार लॉन्ग हॉल गुड्स ट्रेन का सफल संचालन कर रतलाम मंडल ने भारतीय रेल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा।

मंडल द्वारा यह अभिनव प्रयोग समय की अधिकतम उपयोगिता, बेहतर लॉजिस्टिक्स और क्रू दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया।

जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, मंडल रेल प्रबंधक के कुशल मार्गदर्शन एवं परिचालन विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में बिलडी स्टेशन से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से लॉन्ग हॉल ट्रेन का परिचालन किया गया।

रतलाम मंडल के क्रू ने इस मालगाड़ी को लगभग 400 किलोमीटर की दूरी 56 किमी/घंटा की औसत गति से तय करते हुए मात्र 6 घंटे 57 मिनट में न्यू उधना स्टेशन तक पहुँचाया। यह उपलब्धि सामान्य मार्ग से चलने वाली मालगाड़ियों की तुलना में करीब 9–10 घंटे की समय बचत को दर्शाती है।

इस लॉन्ग हॉल ट्रेन में कुल 87 वैगन शामिल थे, जिनका कुल भार 3842 टन रहा। एक ही क्रू सेट के माध्यम से पूरे परिचालन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे लगभग 5 क्रू सेट की बचत संभव हुई। यह कुशल योजना, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से लंबी दूरी तक मालगाड़ी संचालन से बड़ौदा–मुंबई खंड में ट्रेनों के कंजेशन को कम करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। यह उपलब्धि रतलाम मंडल की परिचालन क्षमता, नवाचार और समर्पण को दर्शाती है, जो भविष्य में माल परिवहन को और अधिक तेज, सुरक्षित एवं किफायती बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।