ई-20 पेट्रोल की अनिवार्यता से जनता परेशान : कांग्रेस
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने ई-20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों की माइलेज कम हो रही है और पुराने वाहनों के इंजन प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस ने इस नीति की वैज्ञानिक समीक्षा की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ई-20 पेट्रोल की अनिवार्यता को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस ईंधन के कारण पुराने वाहनों के इंजन प्रभावित हो रहे हैं और माइलेज में भी कमी आ रही है।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बिना व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और सभी पहलुओं के मूल्यांकन के पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर ई-20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया गया है। उनका आरोप है कि इस निर्णय का असर सीधे वाहन मालिकों पर पड़ रहा है, क्योंकि कई लोगों ने अपने वाहनों में तकनीकी समस्याओं और बढ़ते रखरखाव खर्च की शिकायत की है।
कांग्रेस के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित ईंधन की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है, जिससे वाहनों की माइलेज प्रभावित हो सकती है। साथ ही पुराने मॉडल के वाहनों में इसका उपयोग तकनीकी चुनौतियां भी पैदा कर सकता है।
सुशील आनंद शुक्ला ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि एथेनॉल हवा से नमी को तेजी से अवशोषित करता है। ऐसे में पुराने वाहनों के धातु से बने फ्यूल टैंक और फ्यूल पंप में जंग लगने की आशंका बढ़ सकती है, जिससे इंजन को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि यह समस्या विशेष रूप से उन वाहनों में अधिक हो सकती है जिन्हें ई-20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल 2023 से पहले निर्मित या केवल ई-10 ईंधन के लिए तैयार वाहनों में लगे रबर सील, गैस्केट, प्लास्टिक के पुर्जे और फ्यूल पाइप एथेनॉल के लगातार संपर्क में आने से कमजोर हो सकते हैं। इससे ईंधन रिसाव और अन्य तकनीकी खराबियां उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि लंबे समय तक ऐसे वाहनों में ई-20 पेट्रोल का उपयोग किया जाता है, तो फ्यूल इंजेक्टर जाम होने और इंजन के महंगे पुर्जों के खराब होने का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार से ई-20 पेट्रोल नीति की व्यापक वैज्ञानिक समीक्षा कराने और वाहन उपभोक्ताओं की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि किसी भी नई ईंधन नीति को लागू करने से पहले उसके तकनीकी, आर्थिक और उपभोक्ता हितों से जुड़े सभी पहलुओं का समुचित परीक्षण किया जाना चाहिए।