मुख्यमंत्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, एकता और आस्था को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पावन यज्ञ में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह समाज सदैव संगठित और प्रगतिशील रहा है। उन्होंने दानवीर भामाशाह का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके त्याग और दान की भावना आज भी समाज के लिए प्रेरणा है। साथ ही उन्होंने रायगढ़ के संत सत्यनारायण बाबा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका तप और समर्पण समाज के लिए मार्गदर्शक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई समाज एकजुट होकर कार्य करता है, तो उसका लाभ केवल उस समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे राष्ट्र के विकास में योगदान देता है। उन्होंने विश्वास जताया कि साहू समाज इसी प्रकार आगे बढ़ता रहेगा। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण की मांग रखी गई, जिस पर मुख्यमंत्री ने आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संत-महात्माओं की तपोभूमि रही है और यह माता कौशल्या का मायका तथा भगवान श्रीराम का ननिहाल है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “रामलला दर्शन योजना” के तहत हजारों श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन कराए जा चुके हैं। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना” के माध्यम से बुजुर्गों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून समाज में बढ़ती संवेदनशील परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लाया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या छल के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है, ताकि समाज में शांति और सद्भाव बना रहे।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आईजी बालाजी राव, कलेक्टर गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह और जिला पंचायत सीईओ अभिषेक अग्रवाल सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।