“आओ बांटें खुशियां” अभियान के तहत अबूझमाड़ बालक आश्रम में बच्चों संग मनाया गया जन्मदिन
नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ बालक आश्रम, कानागांव में “आओ बांटें खुशियां” अभियान के तहत क्रेडा के सहायक अभियंता विजय कुमार ध्रुव ने बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाया। इस दौरान पौष्टिक भोजन वितरण कर बच्चों के साथ खुशियां साझा की गईं।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर | आओ बांटें खुशियां” अभियान के अंतर्गत नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक आयोजन देखने को मिला। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के सहायक अभियंता विजय कुमार ध्रुव ने अपने परिवार के साथ अबूझमाड़ बालक आश्रम, कानागांव में बच्चों के बीच अपना जन्मदिन मनाया।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना एवं न्योता भोज की भावना के अनुरूप आश्रम में अध्ययनरत बालकों के साथ केक काटा गया। बच्चों के लिए विशेष रूप से खीर, पुड़ी, फल एवं अन्य पौष्टिक आहार की व्यवस्था की गई, जिसका सभी बच्चों ने उत्साहपूर्वक आनंद लिया। आयोजन के दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उल्लास साफ झलक रहा था।
विजय कुमार ध्रुव ने बच्चों के साथ आत्मीयता से समय बिताया और उनसे बातचीत कर उनकी शिक्षा, दैनिक दिनचर्या, रुचियों एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने आश्रम में रह रहे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय एवं आश्रम स्टाफ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस आयोजन ने “आओ बांटें खुशियां” अभियान की मूल भावना को साकार किया, जिसमें समाज के सक्षम वर्ग द्वारा जरूरतमंद बच्चों के साथ खुशियां साझा कर मानवीय संवेदनाओं को मजबूत किया जाता है। बच्चों के लिए यह आयोजन केवल भोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें अपनापन, स्नेह और प्रोत्साहन भी मिला।
कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बच्चों ने ध्रुव और उनके परिवार के साथ मिलकर जन्मदिन का उत्सव मनाया, जिससे उनके बीच आत्मीय संबंध और मजबूत हुआ। इस पहल से बच्चों के मनोबल में वृद्धि हुई और उन्हें यह संदेश मिला कि समाज उनके साथ खड़ा है।
“आओ बांटें खुशियां” अभियान के तहत इस तरह के आयोजन न केवल बच्चों के जीवन में खुशियों के पल जोड़ते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और सामाजिक सहभागिता को भी बढ़ावा देते हैं। यह कार्यक्रम अन्य अधिकारियों और नागरिकों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।