उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने यह बजट एयर-कंडीशनर कमरों में बैठकर बनाया है, इसलिए इसमें आम आदमी, गरीब वर्ग, किसान, श्रमिक, युवा और कर्मचारियों के हितों की कोई वास्तविक झलक नहीं दिखाई देती।
सुशील सन्नी अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने जिस “संकल्प बजट” के नाम पर करीब 1.72 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश किया है, वह केवल कागजी संकल्प बनकर रह गया है। धरातल पर जनता को राहत देने वाली कोई ठोस और भरोसेमंद योजना सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा वर्ग को इस बजट से सबसे अधिक निराशा हाथ लगी है। सरकार से युवाओं को 5 हजार शिक्षकों की भर्ती, पुलिस विभाग में नई भर्ती, बेरोजगारी भत्ता जैसी घोषणाओं के पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन बजट में इन सभी मुद्दों पर चुप्पी साध ली गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युवा केवल भाषण और बड़े-बड़े दावों से नहीं, बल्कि वास्तविक रोजगार और अवसरों से अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रदेश में पहले से ही बेरोजगारी गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया। बजट में रोजगार सृजन को लेकर केवल औपचारिक बातें की गई हैं, जिनका वास्तविक असर दिखना मुश्किल है।
सुशील सन्नी अग्रवाल ने राज्य सरकार की नई आबकारी नीति को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ नई आबकारी नीति बनाकर शराब की दुकानों का विस्तार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बजट में नशा मुक्ति के नाम पर मात्र 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह भाजपा सरकार की दोहरी नीति को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीति यह प्रतीत होती है कि शराब बेचकर राजस्व बढ़ाया जाए और फिर उसी समस्या के समाधान के नाम पर सीमित राशि दिखाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली जाए।
कुल मिलाकर उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के हितों को दरकिनार कर केवल राजस्व और प्रचार आधारित बजट प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शराब बिक्री से आय बढ़ाना ही प्राथमिक उद्देश्य बन गया है, जबकि जनता की परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सुशील सन्नी अग्रवाल ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिस भरोसे पर भाजपा सत्ता में आई थी, उस भरोसे की गारंटी अब कहीं नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की गारंटी और राज्य सरकार की कथित प्रतिबद्धताओं के बीच जमीन-आसमान का अंतर दिख रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि यह बजट गरीब, किसान, श्रमिक, युवा और कर्मचारी वर्ग की आकांक्षाओं को पूरी तरह निराश करने वाला है और आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी जनता के बीच जाकर इस बजट की वास्तविकता को उजागर करेगी।