कोरबा की जीवनदायिनी हसदेव नदी को मिलेगा नया जीवन, 165 करोड़ की परियोजना से होगा कायाकल्प

कोरबा में अमृत मिशन 2.0 के तहत 165 करोड़ रुपये की लागत से हसदेव नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अत्याधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट से दूषित जल का शोधन कर नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा।

Apr 7, 2026 - 20:11
 0  0
कोरबा की जीवनदायिनी हसदेव नदी को मिलेगा नया जीवन, 165 करोड़ की परियोजना से होगा कायाकल्प

UNITED NEWS OF ASIA. भूपेंद्र साहू।  ऊर्जाधानी कोरबा की जीवनरेखा मानी जाने वाली हसदेव नदी अब एक बड़े परिवर्तन की ओर बढ़ रही है। वर्षों से प्रदूषण की मार झेल रही इस महत्वपूर्ण नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘अमृत मिशन 2.0’ के तहत 165 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना स्वीकृत की गई है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि शहर के सतत विकास की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।

अब तक शहर के लगभग 11 बड़े नालों का दूषित सीवरेज जल सीधे हसदेव नदी में मिलकर उसकी स्वच्छता और पारिस्थितिकी को प्रभावित कर रहा था। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए 20 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता का अत्याधुनिक टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन करीब 3 करोड़ 30 लाख लीटर दूषित जल को नदी में गिरने से पहले ही रोका जाएगा और आधुनिक तकनीकों से उसका शोधन किया जाएगा।

इस परियोजना के लागू होने से हसदेव नदी में प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी आएगी और उसका जल पुनः स्वच्छ एवं उपयोगी बन सकेगा। इसके साथ ही यह योजना कोरबा को देश के उन चुनिंदा 12 शहरों की सूची में शामिल कर सकती है, जहां अत्याधुनिक जल शोधन प्रणाली उपलब्ध है। यह उपलब्धि शहर को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगी।

परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा भी है। उपचारित जल को व्यर्थ बहाने के बजाय औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। एनटीपीसी जैसे औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा इस जल को निर्धारित दरों पर खरीदा जाएगा, जिससे नगर निगम की आय में वृद्धि होगी। साथ ही, भू-जल पर निर्भरता कम होने से जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने इस परियोजना को कोरबा जिले के लिए ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के मानकों को ध्यान में रखते हुए नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा तैयार की गई यह योजना अब वास्तविकता का रूप लेने जा रही है। वर्तमान में निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है और जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

इस परियोजना के माध्यम से न केवल हसदेव नदी को नया जीवन मिलेगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल भी बनेगी। पर्यावरणीय स्वच्छता और औद्योगिक विकास के संतुलन को स्थापित करते हुए कोरबा इस पहल के जरिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर सकता है।

कुल मिलाकर, अमृत मिशन 2.0 के तहत हसदेव नदी का यह कायाकल्प कोरबा के पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और भविष्य के लिए एक सकारात्मक और दूरगामी कदम साबित होगा।