UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में 7 अप्रैल 2026 को रोजगार सह आवास दिवस का व्यापक आयोजन किया गया। जिले के सभी 471 ग्राम पंचायतों में यह कार्यक्रम चावल महोत्सव के साथ आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं से जोड़ना, जल संरक्षण को बढ़ावा देना और आजीविका के नए अवसरों पर चर्चा करना था।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण एवं जनमन आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवासों को आगामी 90 दिनों के भीतर पूर्ण करने की रणनीति तैयार की गई। ग्रामीणों के साथ विस्तृत चर्चा कर कार्ययोजना बनाई गई, ताकि समय-सीमा में सभी आवासों का निर्माण पूरा किया जा सके। हितग्राहियों को योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और अन्य समस्याओं के समाधान की जानकारी भी दी गई।
इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा की गई और नए मांग आधारित कार्य प्रारंभ करने पर भी चर्चा हुई। इस दौरान ग्रामीणों को रोजगार के अवसरों और योजनाओं से मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तार से बताया गया।
जिला कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि रोजगार सह आवास दिवस के अवसर पर जल संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई। “मोर गांव-मोर पानी” और “मोर तरिया” अभियान के तहत नए जलस्रोतों के निर्माण के लिए संभावित स्थलों का चयन किया गया। ग्रामीणों के साथ इन स्थलों का निरीक्षण कर “नवा तरिया आय के जरिया” पहल को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई।
कलेक्टर ने बताया कि वर्षा ऋतु के पूर्व जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन के लिए जिले में कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आजीविका डबरी निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिसे जल्द पूरा कर ग्रामीणों के उपयोग में लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यह आयोजन ग्रामीणों को एक मंच प्रदान करता है, जहां वे सामूहिक रूप से गांव के विकास के लिए विचार-विमर्श कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत रोजगार, निर्माण कार्यों की प्रगति और खर्च की जानकारी के लिए क्यूआर कोड के उपयोग की जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को अपने घरों में सोक पिट निर्माण के लिए प्रेरित किया गया, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। साथ ही, आजीविका डबरी के माध्यम से रोजगार के नए अवसरों के बारे में भी जानकारी दी गई।
यह आयोजन न केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीणों में जागरूकता और सहभागिता को भी बढ़ावा मिला। इससे यह स्पष्ट होता है कि सामूहिक प्रयासों और योजनाबद्ध रणनीति के माध्यम से ग्रामीण विकास को नई दिशा दी जा सकती है।