बालोद में पौधों को बचाने अनोखी पहल, मिट्टी के घड़ों से हो रही सिंचाई

बालोद जिला प्रशासन ने गर्मी में पौधों को बचाने के लिए मिट्टी के घड़ों से सिंचाई की अनूठी तकनीक अपनाई है, जिससे पानी की बचत और पौधों की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित हो रही है।

Apr 7, 2026 - 21:18
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बालोद में पौधों को बचाने अनोखी पहल, मिट्टी के घड़ों से हो रही सिंचाई

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील कुमार साहू, बालोद । भीषण गर्मी के मौसम में नव-रोपित पौधों को बचाना एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन बालोद जिला प्रशासन ने इस समस्या का समाधान एक अनोखी और पारंपरिक तकनीक के माध्यम से खोज लिया है। जिले में पौधों के संरक्षण के लिए मिट्टी के घड़ों (मटकों) से सिंचाई की अभिनव पहल की जा रही है, जो न केवल पौधों को जीवित रखने में मदद कर रही है, बल्कि जल संरक्षण का भी उत्कृष्ट उदाहरण बन रही है।

अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि इस तकनीक को जिले में व्यापक स्तर पर लागू किया गया है। संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में लगाए गए 2600 पौधों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में 1200 पौधों सहित कुल 3800 पौधों के संरक्षण के लिए यह व्यवस्था की गई है।

इस तकनीक के तहत प्रत्येक पौधे के पास जमीन में एक मिट्टी का घड़ा दबाया जाता है, जिसमें पानी भरा जाता है। घड़े की संरचना में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों के माध्यम से पानी धीरे-धीरे रिसता है और सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे पौधों को निरंतर नमी मिलती रहती है, जो उनके विकास के लिए बेहद आवश्यक है।

इस विधि का सबसे बड़ा लाभ यह है कि तेज धूप और गर्मी के बावजूद मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों में जहां पानी का अधिक हिस्सा वाष्पीकरण के कारण नष्ट हो जाता है, वहीं इस तकनीक में पानी का अपव्यय न्यूनतम होता है। इससे पानी की बचत के साथ-साथ श्रम और समय की भी बचत होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जहां जल की उपलब्धता सीमित होती है। इसके माध्यम से कम पानी में अधिक पौधों का संरक्षण संभव हो पाता है। यही कारण है कि बालोद जिले में इस पहल को सराहनीय माना जा रहा है।

जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पौधों का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना भी है। अक्सर देखा जाता है कि पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल नहीं हो पाती, जिससे वे सूख जाते हैं। लेकिन इस तकनीक के माध्यम से पौधों के जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ गई है।

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक सोच के संयोजन से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। बालोद प्रशासन की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक बन रही है, जिसे अपनाकर जल संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा सकते हैं।