UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जिसकी चर्चा इन दिनों सरकारी दफ्तरों से लेकर आम लोगों के बीच खूब हो रही है। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में कुर्सी और पद को लेकर लोगों के बीच खींचतान देखने को मिलती है, लेकिन बलरामपुर के लोक निर्माण विभाग (PWD) में कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने सभी को हैरान कर दिया।
दरअसल, बलरामपुर PWD कार्यालय में पदस्थ प्रभारी कार्यपालन अभियंता (EE) विजय भारती अपनी आवंटित मुख्य सरकारी कुर्सी पर कभी नहीं बैठते। दफ्तर आने वाले लोग जब उनके कमरे में प्रवेश करते हैं तो मुख्य कुर्सी हमेशा खाली दिखाई देती है, जबकि विजय भारती उसके बगल में रखी एक सामान्य कुर्सी पर बैठे नजर आते हैं।
शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद यह महज एक संयोग हो, लेकिन जब यह सिलसिला लगातार चलता रहा तो लोगों की उत्सुकता बढ़ने लगी। आखिरकार जब इस बारे में स्वयं विजय भारती से सवाल किया गया तो उन्होंने जो जवाब दिया, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
विजय भारती ने बेहद सरल और विनम्र अंदाज में कहा कि वे खुद को उस मुख्य कुर्सी पर बैठने के योग्य नहीं मानते। उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में प्रभारी कार्यपालन अभियंता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अभी उस पद पर स्थायी रूप से नियुक्त नहीं हुए हैं। ऐसे में नैतिकता और मर्यादा के कारण वे उस कुर्सी पर बैठना उचित नहीं समझते।
उन्होंने कहा, “जब तक मुझे पूर्ण रूप से इस पद की जिम्मेदारी नहीं मिलती, तब तक उस कुर्सी पर बैठना मेरे लिए सही नहीं होगा। पद का सम्मान और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।”
उनकी यह सोच आज के समय में काफी अलग और अनोखी मानी जा रही है। जहां अक्सर लोग छोटी-छोटी जिम्मेदारियों के लिए भी अधिकार जताने लगते हैं, वहीं विजय भारती का यह व्यवहार लोगों के बीच सम्मान का विषय बन गया है।
हालांकि उनकी इस सादगी का एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया है। कई बार ऐसा होता है कि नए लोग या विभाग में पहली बार आने वाले नागरिक मुख्य कुर्सी खाली देखकर यह समझ लेते हैं कि अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं हैं। ऐसे में कई लोग बिना मिले ही वापस लौट जाते हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि साहब तो बगल वाली कुर्सी पर बैठे थे।
PWD विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच अब विजय भारती की यह कार्यशैली चर्चा का केंद्र बन चुकी है। लोग इसे प्रशासनिक मर्यादा और व्यक्तिगत विनम्रता का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।
आज के दौर में, जब पद और अधिकार को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है, ऐसे में बलरामपुर के इस अधिकारी ने यह दिखा दिया कि सच्चा सम्मान केवल कुर्सी से नहीं, बल्कि सोच और व्यवहार से मिलता है। विजय भारती की यह सादगी अब लोगों के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।