रायपुर में नकली पनीर का बड़ा खेल! नोटिस के बाद भी धड़ल्ले से चल रही फैक्ट्री, लोगों की सेहत से खिलवाड़
रायपुर के बिरगांव इलाके में कथित तौर पर नकली पनीर बनाने का बड़ा मामला सामने आया है। Ditya Dairy नाम की यूनिट पर आरोप है कि यहां स्टार्च, डिटर्जेंट और सिंथेटिक दूध से नकली पनीर तैयार कर बाजार में सप्लाई किया जा रहा है। नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों की सेहत और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिरगांव क्षेत्र के रावाभाटा इलाके में स्थित एक डेयरी यूनिट पर कथित तौर पर नकली पनीर बनाने और बाजार में सप्लाई करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने नोटिस तो जारी किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, देवी कोल्ड स्टोरेज के पीछे संचालित Ditya Dairy नाम की यूनिट में बड़े पैमाने पर नकली पनीर तैयार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां मछली रखने वाले थर्माकोल बॉक्स में पनीर भरकर बाजारों और दुकानों तक सप्लाई की जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस कथित नकली पनीर को बनाने में स्टार्च, डिटर्जेंट पाउडर और सिंथेटिक दूध जैसी खतरनाक चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मिलावटी और रासायनिक तत्वों से बने खाद्य पदार्थ मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं। लगातार इस तरह का पनीर खाने से लीवर, किडनी और पाचन तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
मामले के उजागर होने के बाद नगर निगम बिरगांव द्वारा यूनिट को नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि नोटिस देने के बाद भी फैक्ट्री पहले की तरह संचालित हो रही है और प्रशासन की ओर से अब तक कोई कड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। यही वजह है कि अब लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 की धारा 59 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति असुरक्षित या मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तीन साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद यदि इस तरह की गतिविधियां खुलेआम जारी हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि केवल नोटिस देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती, बल्कि ऐसी फैक्ट्रियों को सील कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना जरूरी है।
यह मामला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुका है। लोग प्रशासन से पूछ रहे हैं कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह नकली खाद्य पदार्थों का कारोबार और भी बढ़ सकता है।
जनता अब जवाब मांग रही है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य से जुड़ा यह मुद्दा केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शहर के लिए खतरे की घंटी है। ऐसे में प्रशासन को जल्द से जल्द सख्त कदम उठाने होंगे ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और मिलावटखोरों पर लगाम लग सके।